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धनंजय की याचिका ख़ारिज, फाँसी होगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कोलकाता में एक स्कूली छात्रा के बलात्कार और हत्या के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने धनंजय चटर्जी के भाई की याचिका ख़ारिज कर दी है. सर्वोच्च न्यायालय की पाँच सदस्यों की खंडपीठ के इस फैसले का मतलब है कि धनंजय चटर्जी को 14 अगस्त तड़के साढ़े चार बजे अलीपुर सेंट्रल जेल में फाँसी दी जाएगी. सर्वोच्च न्यायालय ने धनंजय को फाँसी की सज़ा सुनाई थी जिसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के सामने माफ़ी की अपील की थी. लेकिन राष्ट्रपति ने भी क्षमादान से इनकार कर दिया. धनंजय के वकील कॉलिन गुनसाल्वेस दोबारा सर्वोच्च न्यायालय गए और उन्होंने न्यायालय के सामने ये कारण दिया कि धनंजय के परिवार को नहीं बताया गया कि उनकी क्षमादान की याचिका क्यों रद्द की गई है. लेकिन अब सर्वोच्च न्यायालय ने इस याचिका को ख़ारिज कर दिया है जिससे धनंजय को दी गई फाँसी की सज़ा बरक़रार है और उन्हें शुक्रवार को फाँसी दी जाएगी. धंनजय को 14 वर्ष पहले स्कूल जाने वाली एक लड़की हेतल पारेख के बलात्कार और हत्या के मामले में निचली अदालत, कोलकाता हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने दोषी पाया था. धनंजय के पिता वंशीधर, उनके भाई और पत्नी कह चुके हैं कि अगर धनंजय को फाँसी दी गई तो वे भी आत्महत्या कर लेंगे. कोलकाता में ज़्यादातर लोग धनंजय को दी जाने वाली फाँसी की सज़ा का समर्थन करते हैं लेकिन कुछ मानवाधिकार संगठनों ने इस सज़ा का विरोध किया है. इन संगठनों का कहना है कि सज़ा-ए-मौत से कभी भी अपराधों में कमी नहीं आई और धनंजय चटर्जी को ज़्यादा से ज़्यादा उम्र क़ैद की सज़ा दी जानी चाहिए. |
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