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धनंजय के गाँव में भारी नाराज़गी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
धनंजय चटर्जी को एक छात्रा के साथ बलात्कार और हत्या के मामले में फाँसी दिए जाने से उनके पैतृक गाँव के लोग नाराज़ हैं. कोलकाता से 240 किलोमीटर दूर स्थित बाँकुड़ा के कुलुडीही गाँव के लोगों ने शनिवार को काले बिल्ले पहनकर अपनी नाराज़गी का इज़हार किया. एक स्थानीय नेता प्रभात चटर्जी का कहना है, "ये हमारे गाँव के लिए दुख का दिन है. हम अपना दुख काले बिल्ले पहनकर व्यक्त कर रहे हैं." बाँकुड़ा में धनंजय के माता-पिता के घर के बाहर कम से कम तीस पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं. उस घर में घनंजय के 76 वर्षीय पिता बंशीधर और 70 वर्षीय माता बेला रानी अपने दो अन्य पुत्रों, बेटी और उनके बच्चों के साथ रहती हैं. उनके माता-पिता ने धनंजय को फाँसी दिए जाने की स्थिति में आत्महत्या करने की धमकी दी थी.
जब पत्रकारों ने उनको धनंजय को फाँसी दिए जाने की ख़बर पहुँचाई तो घर से चीखो-पुकार सुनाई दी. बंशीधर, जो एक पुरोहित हैं, कहने लगे, "सब तबाह हो गया. मैं अपने बेटे को बचाने के लिए क़ानूनी लड़ाई लड़ते-लड़ते पहले ही दिवालिया हो चुका हूँ." धनंजय की माता रोते-रोते उनके बचपन की यादें सुनाने लगीं. उनका कहना था, "वह ज़्यादा कुछ बोलता नहीं था. अब मैने उसको हमेशा के लिए खो दिया है." तीन डॉक्टर इस परिवार के सदस्यों की सेहत पर नज़र रख रहे हैं और ये सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि वे समय-समय पर भोजन करें. लेकिन कुछ ही दूरी पर स्थित धनंजय की पत्नी के घर पर ताला लगा हुआ है. गाँव के निवासियों का कहना है कि वे लोग इस दुख की घड़ी में धनंजय के परिवार वालों के साथ हैं. परिवार के एक मित्र गौरांग कुंभकार का कहना था, "हम चटर्जी परिवार का ध्यान रखेंगे. लेकिन हमें ये लगता है कि धनंजय को झूठा फँसाया गया क्योंकि वह एक ग़रीब व्यक्ति था." |
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