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मुझे पार्टी का समर्थन है:सुषमा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने कहा है कि वह व्यक्तिगत रूप से सोनिया गाँधी के ख़िलाफ़ नहीं हैं और विदेशी मूल का मुद्दा किसी महिला या पुरुष विशेष के ख़िलाफ़ नहीं है. बीबीसी हिंदी सेवा के साप्ताहिक कार्यक्रम 'आपकी बात - बीबीसी के साथ' में श्रोताओं के सवालों के जवाब देते हुए सुषमा स्वराज ने कहा कि अगर विदेशी मूल के किसी पुरुष को भी प्रधानमंत्री जैसे पद पर बिठाने की कोशिश की जाएगी तो वह उसका भी विरोध करेंगी. बीबीसी के एक श्रोता ने सुषमा स्वराज से सवाल पूछा था कि वह महिला होकर ही एक महिला का इस हद तक विरोध क्यों कर रही हैं जबकि भारतीय संस्कृति में विवाह के बाद ससुराल ही किसी महिला का असली घर होता है. जवाब में सुषमा स्वराज ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से सोनिया गाँधी के ख़िलाफ़ नहीं हैं और यह सिद्धांत रूप से विदेशी मूल के किसी व्यक्ति के प्रधानमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठने का विरोध है. सोनिया गाँधी के विरोध के मुद्दे पर पार्टी मे अलग-थलग पड़ने के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सुषमा स्वराज ने कहा कि वह इस मुद्दे पर अकेली नहीं पड़ीं उनकी पार्टी का पूरा समर्थन उन्हें रहा है. हाल के चुनावों के बारे में सुषमा स्वराज ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की हार हुई है और पार्टी इसे स्वीकार करती है. लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इन चुनावों का परिणाम किसी पार्टी विशेष के लिए सकारात्मक नहीं बल्कि नकारात्मक परिणाम का नतीजा है कि काँग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन सरकार बना सका है. गुजरात के बारे में सुषमा स्वराज ने कहा कि हार का कारण गुजरात नहीं था और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के गुजरात और नरेंद्र मोदी के बारे में बयानों को ग़लत संदर्भ में पेश किया गया. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी दरअसल गुजरात के बारे में विपक्ष के 'अप्रचार' का सही तरीक़े से मुक़ाबला नहीं कर पाई. |
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