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अब नहीं, बहुत हुआ: वाजपेयी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पहली बार स्पष्ट शब्दों में कहा है कि बहुत हुआ, अब वह पार्टी का नेतृत्व और नहीं करना चाहते. संघ परिवार और पार्टी के भीतर से हो रहे हमलों से परेशान वाजपेयी जब षणमुखानंद सभागार में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करके जा रहे थे तभी नारा लगा, 'अगली बारी अटल बिहारी...' बस इतना सुनते ही वाजपेयी मराठी में बोल उठे, 'अता नको, पुष्कल झाल'. हिंदी में उसका मतलब होता है, 'अब नहीं, बहुत हो गया'. पार्टी के भीतर से हो रही बौछार पर टिप्पणी करते हुए वाजपेयी ने कहा, "पहली बार मुझ पर बौछार हो रही है." इस मौक़े पर वाजपेयी के ऊपर लिखे गए लेखों के संग्रह का विमोचन किया गया जिसके बारे में पूर्व प्रधानमंत्री का कहना था कि ऐसे में जब उन पर बौछार हो रही है ये क़िताब उन्हें सहारा देती है. इस मौक़े पर पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और पार्टी प्रमुख वेंकैया नायडू भी मौजूद थे. जब से चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है तब से संघ परिवार उन पर निशाना साध रहा है. मनाली में जब उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध टिप्पणी की तब भी पार्टी और संघ ने खुलकर मतभेदों का इज़हार किया था. वाजपेयी ने इस मौक़े पर ये भी कहा कि हार और जीत तो लोकतंत्र का हिस्सा है जिससे चुनाव की प्रक्रिया जुड़ी हुई है. उनका कहना था कि चुनाव सुधार जैसे विषयों पर आम सहमति के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए. मगर नई सरकार ऐसा कर रही है. राजनीति में धन के बढ़ते प्रभाव पर उनका कहना था, "जनतंत्र धनतंत्र में बदल जाएगा." |
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