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हिंदुत्व की ओर वापस लौटने के संकेत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पहले दिन तो गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का साया ही हावी रहा. तीन दिन की इस बैठक में पहले दिन की बैठक के बाद एक महत्वपूर्ण संकेत यह मिला कि भाजपा हिंदुत्व के अपने पुराने मुद्दे पर फिर लौट रही है. हालांकि भाजपा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नरेंद्र मोदी को मुख्यमंत्री पद से नहीं हटाया जा रहा है लेकिन पार्टी के भीतर खींचतान ख़त्म होती दिखाई नहीं दे रही है. गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी का बहिष्कार कर दिया है. वैसे पार्टी के नेता यह साफ़ साफ़ नहीं कह रहे हैं कि कार्यकारिणी में गुजरात पर चर्चा हो रही है. पहले दिन की बैठक के बाद पार्टी प्रवक्ता मुख़्तार अब्बास नक़वी ने कहा, "आज गुजरात देश की राजनीति के मध्य में है तो उस पर चर्चा हो रही है, कल महाराष्ट्र पर होगी." हिंदुत्व उधर इस बात के साफ़ संकेत हैं कि आने वाले दिनों में राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा हिंदुत्व की ओर लौट रही है. अपने भाषण में पार्टी अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने कहा, "हमारी पार्टी हिंदुत्व की विचारधारा से प्रेरित आंदोलन का हिस्सा है." पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा "पार्टी ने हिंदुत्व का मुद्दा कभी छोड़ा ही नहीं था, अलग अलग चुनावों में अलग-अलग मुद्दे केंद्र में रहते हैं." उनका कहना था कि हिंदुत्व पर लौटने की बात तो तब होती जब यह कभी यह कहा गया होता कि हिंदुत्व को छोड़ दिया गया है. कार्यकारिणी की बैठक अभी दो दिन और चलनी है. इस बैठक में लोकसभा चुनावों में हुई पराजय पर चर्चा के अलावा आने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी की रणनीति पर विचार होना है. |
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