 |  आक्रामक मुद्रा में दिखने की कोशिश की है भाजपा ने |
भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की मुंबई बैठक में एक विस्तृत राजनीतिक प्रस्ताव पारित किया गया. प्रस्ताव की मुख्य बातें- चुनाव चौदहवीं लोकसभा दो बातों के लिए याद की जाएगी- अब तक का सर्वाधिक खंडित जनादेश और पहली कांग्रेस साझा सरकार का उदय जो कि देश को अस्थिरता की ओर ले जाएगी. पराजय भाजपा जनादेश को विनम्रता से स्वीकार करती है. चुनाव परिणाम सभी अनुमानों के विपरीत रहे. जनादेश के अनुरूप भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उसके सहयोगी रचनात्मक और ज़िम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाएँगे. यह स्पष्ट हो चुका है कि चुनावों से पूर्व के हमारे आकलन ज़मीनी सच्चाइयों से मेल नहीं खाते थे. हम कई राज्यों में चल रही नकारात्मक लहर को देख नहीं पाए. पार्टी ने इस हार की विस्तृत समीक्षा के लिए एक कमेटी गठित की है. अटल बिहारी वाजपेयी राष्ट्रीय कार्यकारिणी अटल बिहारी वाजपेयी का आभार व्यक्त करती है कि उन्होंने छह साल तक प्रधानमंत्री रहने के दौरान कुशल नेतृत्व प्रदान किया. भाजपा इन छह वर्षों के शासन को अपने भविष्य के कार्यक्रम के लिए मील के पत्थर के रूप में इस्तेमाल करेगी. यूपीए सरकार पार्टी केंद्र में कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार के गठन को एक पतनशील घटना के रूप में देखती है. इसे धर्मनिरपेक्ष ताकतों की सरकार कहना ग़लत है, दरअसल ये छद्म-धर्मनिरपेक्षतावादी और धर्मनिरपेक्षता विरोधी ताक़तें हैं. एक उदाहरण है मंत्रिपरिषद में मुस्लिम लीग के एक सदस्य को शामिल किया जाना जो कि खुले तौर पर एक सांप्रदायिक पार्टी है. कांग्रेस पार्टी ने जघन्य अपराधों में शामिल लोगों को मंत्रपरिषद में शामिल कर सरकार की स्वच्छता के साथ समझौता किया है. बहुकेंद्रीय सत्ता कांग्रेस ने सत्ता के दो केंद्र बनाकर शासन व्यवस्था के साथ खिलवाड़ किया है जिसमें प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह 'सुपर प्राइममिनिस्टर' सोनिया गाँधी के मोहरा बने हैं. देश के इतिहास में पहली बार एक निर्वाचित प्रधानमंत्री के बजाय एक मनोनीत प्रधानमंत्री मिला है जिसके पास वास्तविक अधिकार नहीं हैं. कम्युनिस्ट भाजपा नई सत्ता व्यवस्था में तीसरे सत्ता केंद्र के रूप में कम्युनिस्टों के उदय से चिंतित है. यह स्पष्ट है नई सरकार को विचारधारा और कार्यक्रम के स्तर पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का नेतृत्व मिल रहा है, जिसके पास वीटो भी है और फाँसी का फंदा भी. तालमेल का अभाव पहले ही दिन से स्पष्ट हो गया कि नई सरकार में आपसी तालमेल का अभाव है. भाजपा नई सरकार के साझा न्यूनतम कार्यक्रम में सीमा पार आतंकवाद या बांग्लादेशी घुसपैठियों का ज़िक्र नहीं होने से चिंतित है. पार्टी पोटा क़ानून को रद्द किए जाने के सरकार के फ़ैसले की निंदा करती है. माँग भाजपा माँग करती है कि नई सरकार अविलंब संसद और विधान सभाओं में महिलाओं को आरक्षण दिलाने के लिए विधेयक पेश करे. हमारी माँग है कि नदियों को परस्पर जोड़ने की परियोजना तुरंत शुरू की जाए. पाँच काम राष्ट्रीय कार्यकारिणी हर स्तर पर पार्टी को इन पाँच बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करने का निर्देश देती है- 1. विचारधारा और आदर्शों की ओर फिर से लौटना 2.विकास के मुद्दों, खास कर किसानों, ग़रीबों और बेरोज़गारों से जुड़े मुद्दों पर कटिबद्धता दोहराना 3.संगठनात्मक कमियों को दूर करना, ख़ास तौर पर उन राज्यों में जहाँ चुनाव होने हैं 4.नए इलाक़ों और सामाजिक वर्गों में पार्टी की अपील बढ़ाना 5.केंद्र की कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार के विरोधाभासों, विवशताओं और नाकामियों का भंडाफोड़ |