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भाजपा मूल विचारधारा की ओर लौटेगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी ने पार्टी की मूल विचारधारा और आदर्शों की तरफ़ वापस लौटने का संकल्प व्यक्त किया है. हालाँकि पार्टी ने 'हिंदुत्व' शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है. मुंबई में आयोजित पार्टी कार्यकारिणी की बैठक में बुधवार को पारित प्रस्ताव में विकास के मुद्दों, ख़ासकर किसानों और ग्रामीण इलाक़ों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने का वादा किया गया है. आक्रामक हिंदुत्व की तरफ़ वापसी की कुछ सदस्यों की माँग की अनदेखी करते हुए प्रस्ताव में राम जन्म भूमि, संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने और समान आचार संहिता लागू किए जाने जैसे मुद्दों पर कुछ नहीं कहा गया है. लालकृष्ण आडवाणी ने बैठक को संबोधित करते पार्टी सदस्यों से कहा कि पार्टी का आधार बढ़ाने के लिए संघ परिवार को भी 'साथ लेकर चलें'. मंगलवार को शुरू हुई बैठक के मौक़े पर ऐसे संकेत थे कि पार्टी में हिंदुत्व की तरफ़ वापस लौटने के लिए काफ़ी दवाब बन रहा है. पार्टी अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने मंगलवार को कहा था, "हमारी पार्टी हिंदुत्व की विचारधारा से प्रेरित आंदोलन का हिस्सा है." पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री शत्रुघ्न सिन्हा ने भी कहा था, "पार्टी ने हिंदुत्व का मुद्दा कभी छोड़ा ही नहीं था, अलग अलग चुनावों में अलग-अलग मुद्दे केंद्र में रहते हैं." उनका कहना था कि हिंदुत्व पर लौटने की बात तो तब होती जब यह कभी यह कहा गया होता कि हिंदुत्व को छोड़ दिया गया है. कार्यकारिणी की तीन दिवसीय बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में विश्वास व्यक्त किया गया है. पार्टी ने स्वीकार किया है कि उसका चुनाव पूर्व आकलन सही नहीं था और उससे मतदाताओं के रुख़ की सही झलक नहीं मिलती थी. पार्टी ने पिछले लोकसभा चुनावों में पराजय के लिए संगठनात्मक कमियों की बात भी स्वीकार की है. 'सुपर-प्राइममिनिस्टर' प्रस्ताव में केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार पर आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी 'सुपर-प्राइममिनिस्टर' की भूमिका निभा रही हैं.
आरोप में कहा गया, "देश में पहली बार एक चयनित प्रधानमंत्री (का शासन) है, निर्वाचित का नहीं." यूपीए दलों पर प्रधानमंत्री पद की गरिमा कम करने का आरोप लगाते हुए प्रस्ताव में कहा गया है कि मनमोहन सिंह 'सुपर प्राइममिनिस्टर' सोनिया गाँधी के दूसरे नंबर नेता की भूमिका निभा रहे हैं. भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने साम्यवादी दलों के बढ़ते प्रभाव को भी गंभीरता से लिया है. प्रस्ताव में कहा गया है, "भाजपा नई सत्ता में साम्यवादियों के तीसरे सत्ता केंद्र के रूप में उदय को बड़ी चिंता से देखती है." भाजपा ने आरोप लगाया है कि संख्या की दृष्टि से कांग्रेस भले ही मौजूदा केंद्र सरकार में आगे-आगे हो, लेकिन सरकार को वैचारिक नेतृत्व बाहर से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी दे रही है. पार्टी ने अपने प्रस्ताव में केंद्र सरकार में शामिल ऐसे मंत्रियों को लेकर भी चिंता जताई है जिनके ख़िलाफ़ आपराधिक मामले दर्ज हैं. भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को महंगाई और 'आंतकवाद' के मुद्दे पर नरमी के कथित रुख़ को लेकर घेरने की योजना बनाई है. |
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