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भाजपा कार्यकारिणी में ज़ोर आज़माइश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गुजरात दंगों और मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के इर्दगिर्द उठे विवादों के बीच भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उदारवादियों और कट्टरपंथियों के बीच एक दो धड़े बनते नज़र आ रहे हैं. दोनों ही धड़े गुजरात दंगों और मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के मुद्दे पर अपने-अपने पक्ष पर ज़ोरआज़माइश कर रहे हैं. कट्टरपंथी धड़ा चाहता है कि मोदी मुद्दा बहस के लिए नहीं लाया जाए जबकि उदारवादी धड़ा गुजरात और मोदी मुद्दे पर बहस कराने के पक्ष में है. समझा जा रहा है कि पूर्वप्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी मोदी मुद्दा नहीं उठाए जाने पर इस शर्त राज़ी हुए हैं कि गुजरात में हुए सांप्रदायिक दंगों पर ज़रूर बहस कराई जाए. लेकिन कट्टरपंथी धड़ा दंगों पर भी बहस कराने के पक्ष में नहीं है. पार्टी में इस मुद्दे पर भी मंथन चल रहा है कि क्या हिंदुत्व के कट्टर रुख़ पर वापस लौटा जाए.
मंगलवार को बैठक के सुबह के सत्र के बाद पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा कि बैठक में छदम धर्मनिरपेक्षता के हिमायतियों की निंदा की गई. भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस और वामपंथी दलों पर धर्मनिरपेक्षता के मामले में दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाती है और उन्हें छदम धर्मनिरपेक्षतावादी कहती है. पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि ग्रामीण विकास और किसानों के मुद्दों पर भी बहस होगी. यह भी कहा जाता कि भाजपा की हार की एक वजह यह भी रही कि उसने ग्रामीण इलाक़ों और किसानों की समस्याओं पर ख़ास ध्यान नहीं दिया था. विवाद बैठक से पहले ही इस विवाद ने काफ़ी तूल पकड़ा कि गुजरात में 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगे हाल के चुनावों में भाजपा की हार की वजह थे या नहीं. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने मनाली में यह कहकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया था कि गुजरात दंगे इन चुनावों में भाजपा की हार की एक मुख्य वजह थे और मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को नहीं हटाया जाना एक ग़लती थी. हालाँकि वाजपेयी ने बाद में यह कहकर सबको चौंका दिया कि मोदी मुद्दा अब पुराना पड़ चुका है और पुरानी बातें भूलकर आगे की बात करनी चाहिए. पार्टी महासचिव प्रमोद महाजन ने सोमवार को मुंबई में कहा था कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को हटाने के संबंध में कोई चर्चा नहीं होगी मोदी को हटाने का मुद्दा अब ख़त्म हो चुका है. प्रमोद महाजन ने कहा था कि पार्टी पिछले चुनाव में हार के बावजूद कोई 'बलि का बकरा' नहीं ढूंढ रही है. उन्होंने कहा, "हर कोई लोकसभा चुनाव के नतीजे से नाखुश है. मगर हम कोई बलि का बकरा नहीं तलाश रहे." पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की तीन दिन की बैठक के लिए सभी प्रमुख भाजपा नेताओं समेत पूरे देश से पार्टी प्रतिनिधि मुंबई में एकत्र हुए हैं. पार्टी अध्यक्ष वेंकैया नायडू मंगलवार को और लालकृष्ण आडवाणी बुधवार को भाषण देंगे. कार्यकारिणी का समापन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भाषण से गुरूवार को होगा. |
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