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'भारत-पाक परमाणु संबंध क्षेत्रीय नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद अल बरादेई ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान अपने बीच तनाव को द्विपक्षीय आधार पर ही कम कर सकते हैं. उन्होंने कहा है कि जहाँ तक दोनों देशों के बीच परमाणु मुद्दे हैं, तो वो व्यापक तौर पर पूरी दुनिया से जुड़े हुए हैं और इन दोनों देशों के परमाण संबंधों को अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए. बीबीसी ने बरादेई से यह सवाल पूछा था कि भारत और पाकिस्तान ने अपने परमाणु क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए जो रुख़ अपनाया है क्या वह ऐसे मुद्दों को क्षेत्रीय स्तर पर ही हल करने के लिए एक सही तरीक़ा हो सकता है. इस सवाल के जवाब में बरादेई ने कहा, "मैं नहीं समझता कि भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु समस्या को सिर्फ़ क्षेत्रीय स्तर पर हल किया जा सकता है क्योंकि उसमें क्षेत्र के कुछ और देश जुड़े हुए हैं." "इसलिए भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव द्विपक्षीय आधार पर कम तो किया जा सकता है लेकिन जहाँ तक परमाणु हथियारों का मुद्दा है तो उन्हें एक बड़े परिप्रेक्ष्य में देखना होगा." बरादेई ने कहा कि इस मुद्दे को भी दुनिया में परमाणु हथियारों से मुक्ति पाने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के एक हिस्से के रूप में ही देखा जाना चाहिए. ग़ौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान ने परमाणु कार्यक्रमों के बारे में एक् दूसरे को जानकारी देने और आपसी भरोसा बढ़ाने के मक़सद से हाल ही में विदेश मंत्रियों के बीच एक हॉटलाइन बनाई है. अल बरादेई ने सोमवार को चेतावनी दी थी कि परमाणु संसाधनों के आतंकवादियों के हाथ में पड़ने से रोकने के लिए फ़ौरन क़दम उठाना ज़रूरी है. वाशिंगटन में एक सम्मेलन में अल बरादेई ने कहा था कि इस दिशा में किसी तरह की कार्रवाई करने में पहले ही देर हो चुकी है. अंतरराष्ट्रीय शांति पर आयोजित सम्मेलन में बारदेई ने नाभिकीय हथियारों को बनाने में काम आनेवाले तत्वों यूरेनियम और प्लूटोनियम के ग़लत हाथों में पड़ जाने से होनेवाले ख़तरे के प्रति आगाह किया. |
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