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दक्षिण एशिया में टिकाऊ शांति पर ज़ोर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने दक्षिण एशिया क्षेत्र में टिकाऊ शांति स्थापना का आहवान किया है. भारत में हाल ही में आम चुनाव के बाद बनी नई सरकार के विदेश मंत्री नटवर सिंह की पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी के साथ यह पहली मुलाक़ात थी. ये दोनों मंत्री 22 सदस्यों वाली एशियाई सहयोग वार्ता की तीसरी बैठक में भाग लेने के लिए चीन के किंगडाओ शहर में हैं. दोनों मंत्रियों ने दोपहर का भोजन एक साथ बैठकर किया और भोजन के बाद भी क़रीब काफ़ी देर तक साथ-साथ रहे. मुलाक़ात के बाद कसूरी ने पत्रकारों से कहा कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही देश ज़िम्मेदार और परिपक्व परमाणु शक्तियाँ हैं. "हाँ मैं परमाणु निरस्त्रीकरण का हिमायती हूँ लेकिन यह पूरी दुनिया में होना चाहिए."
ग़ौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान परमाणु जानकारी के आदान-प्रदान के लिए विदेश मंत्रालयों के बीच हॉटलाइन बनाने पर एक दिन पहले ही रविवार को सहमत हुए हैं. समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक़ कसूरी ने कहा कि दोनों ही देश कश्मीर समस्या को हल करने के लिए उत्सुक हैं और इस बारे में भी दोनों ने चर्चा की. "हम दक्षिण एशिया में टिकाऊ शांति चाहते हैं और इसके लिए हमें कश्मीर मसले को हल करना होगा." हालाँकि कसूरी ने इस बारे में कुछ नहीं कहा कि कश्मीर मसले का समाधान कैसे होगा. कसूरी ने कहा, "मैं आपको पाकिस्तान सरकार की तरफ़ से यह कह सकता हूँ कि हमारे अंदर राजनीतिक इच्छाशक्ति है. हम उम्मीद करते हैं कि भारत सरकार भी ऐसी ही राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाएगी." कसूरी ने यह भी कहा कि नटवर सिंह से मुलाक़ात के बाद उन्हें यह विश्वास सा लग रहा है कि भारत सरकार भी सभी मसलों को हल करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखा रही है.
उधर भारतीय विदेश मंत्री नटवर सिंह ने पत्रकारों के सवालों के जवाब तो नहीं दिए लेकिन इतना कहा कि कसूरी के साथ उनकी मुलाक़ात बहुत अच्छी रही है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार भारतीय विदेश मंत्रालय ने दोनों मंत्रियों की मुलाक़ात को सौहार्दपूर्ण और रचनात्मक बताया है. मंत्रालय ने कहा है कि दोनों मंत्री शांति प्रकिया में राजनीतिक सहयोग देने पर राज़ी हुए हैं. सिलसिला नटवर सिंह और क़सूरी हाल के दिनों में टेलीफ़ोन पर कई बार बात कर चुके हैं. नटवर सिंह 20 और 21 जुलाई को सार्क देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए पाकिस्तान भी जाएँगे. विदेश मंत्री बनने के बाद उनकी ये पहली पाकिस्तान यात्रा होगी. भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में सुधार के लिए इस वर्ष के आरंभ में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने कई ठोस क़दम उठाए थे. पिछले महीने सत्ता में आई मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने भी बातचीत की प्रक्रिया जारी रखने की घोषणा की है. इसके तहत 19 और 20 जून को दिल्ली में दोनों देशों के बीच परमाणु मामलों में आपसी विश्वास बढ़ाने के लिए बातचीत हुई. इस बातचीत में दोनों देशों के बीच परमाणु परीक्षणों पर रोक और दोनों के विदेश मंत्रालयों के बीच हॉटलाइन संपर्क स्थापित करने पर सहमति हुई. बातचीत की प्रक्रिया के तहत ही 27 और 28 जून को दोनों देशों के बीच विदेश सचिव स्तर की बातचीत होनी है. |
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