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परमाणु सुरक्षा को लेकर नया क़ानून | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में मंत्रिमंडल ने परमाणु टेक्नॉलॉजी की सुरक्षा से संबंधित एक नए क़ानून के मसौदे को मंज़ूरी दे दी है. पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र ने एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें कहा गया था कि परमाणु टेक्नॉलॉजी को आतंकवादियों के हाथों में पड़ने से बचाया जाना चाहिए. इस वर्ष के शुरू में पाकिस्तान से परमाणु जानकारी लीक होने की ख़बरें आने के बाद काफ़ी हंगामा मचा था और राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को सफ़ाई देनी पड़ी थी. आरोप लगे थे कि पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के जनक डॉक्टर अब्दुल क़दीर ख़ान ने जानकारियाँ लीबिया, ईरान और उत्तर कोरिया को दी थीं. पाकिस्तान के राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने अब्दुल क़दीर ख़ान को क्षमादान देने की घोषणा की थी लेकिन अब नए क़ानून के तहत दोषी व्यक्ति को चौदह वर्ष तक कारावास की सज़ा हो सकती है. नए क़ानून का प्रस्ताव अब संसद में रखा जाएगा और इसके बिना किसी विरोध के पारित हो जाने की संभावना है. इस क़ानून के तहत परमाणु सामग्रियों, जानकारियों, उपकरणों और हथियारों के किसी भी तरीक़े से देश के बाहर भेजे जाने पर कड़ा प्रतिबंध होगा.
एक सरकारी बयान में कहा गया है, "इस प्रस्ताव में पाकिस्तान की प्रतिबद्धता झलकती है कि वह परमाणु प्रसार को रोकना चाहता है." सरकारी प्रवक्ता ने कहा है कि परमाणु जानकारी लीक करने वाले लोगों के खिलाफ़ नए क़ानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी लेकिन अब्दुल क़दीर ख़ान पर कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा जिन्हें पहले ही माफ़ी दी जा चुकी है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि यह प्रस्ताव चार वर्षों तक किए गए विचार-विर्मश का परिणाम है और "यह हमारे लिए बड़ी ख़बर है." पाकिस्तान और भारत के बीच परमाणु कार्यक्रमों को लेकर आपसी विश्वास बढ़ाने के लिए बातचीत अगले महीने होने वाली है. दोनों देशों के बीच परमाणु हथियारों और केंद्रों के बारे में वार्षिक तौर पर जानकारी के आदान-प्रदान का कार्यक्रम पहले से ही चल रहा है. |
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