|
सदनों की बैठक हंगामे के बीच स्थगित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मनमोहन सिंह सरकार में शामिल कुछ मंत्रियों के आपराधिक मामलों में फंसे होने को लेकर चल रहे विवाद ने संसद में लगातार तीसरे दिन भी कामकाज नहीं होने दिया. राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव बिना किसी बहस के पारित हो गया और संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई. दोनों ही सदनों में विपक्षी दलों ने फिर हंगामा किया और 'दाग़ी मंत्री इस्तीफ़ा दो', 'दाग़ी मंत्री की सरकार नहीं चलेगी' जैसे नारे लगाए. सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इस नारेबाज़ी का विरोध किया और आगे तक चले आए. राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रखा. इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया. राज्यसभा सभापति भैरों सिंह शेखावत ने राज्यसभा के सदस्यों से कहा कि वे विवादास्पद स्थितियों से बाहर निकलने की कोशिश करें. उनका कहना था कि विवादों का हल ढूँढ़ा जाए जिससे सदन सुचारु रूप से चल सके. चौदहवीं लोकसभा के पहले सत्र की शुरुआत दो जून को हुई थी और पहले दो दिन शपथ ग्रहण के बाद चार जून को लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव हुआ था. इसके बाद सात जून को राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित किया. इस बीच नौ जून को लोकसभा उपाध्यक्ष पद का चुनाव हुआ जिसमें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की ओर से अकाली दल के चरणजीत सिंह अटवाल को सर्वसम्मति से उपाध्यक्ष चुना गया. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||