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गतिरोध जारी, मनमोहन आडवाणी से मिले | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आपराधिक मामलों में फंसे मंत्रियों के मुद्दे पर संसद में गतिरोध बना हुआ है. गतिरोध को दूर करने की कोशिशों के तहत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी से मुलाक़ात की है. लेकिन लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी के उपनेता और पार्टी प्रवक्ता विजय कुमार मल्होत्रा ने कहा कि जब तक प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष नहीं रखते पार्टी अपने रुख़ पर अटल रहेगी. मंगलवार को भी इस मुद्दे पर विपक्षी पार्टियों ने जम कर हंगामा किया. हंगामे के कारण दोनों ही सदनों में काम नहीं हो सका और कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई. भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में विपक्ष ने लोकसभा और राज्यसभा में काम शुरू होते ही हंगामा शुरू कर दिया. लोकसभा में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बगल में बैठे एनडीए संयोजक जॉर्ज फ़र्नांडिस ने सबसे पहले ये मुद्दा उठाया जिसके बाद हंगामा शुरू हो गया. दाग़ी कहे जा रहे इन मंत्रियों के विरूद्ध नारे लगाते हुए तृणमूल नेता ममता बनर्जी, पूर्व मंत्री सत्यनारायण जेटिया और अशोक प्रधान दीर्घा में चले गए. लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी और कांग्रेस नेता और केंद्रीय मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने अपने-अपने पक्ष के लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की, फिर भी हंगामा नहीं रुका. हंगामा जारी रहने के बाद लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने दोपहर दो बजे तक के लिए सदन को स्थगित कर दिया. मगर दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भी हंगामा जारी रहा जिसके बाद अध्यक्ष ने दिन भर के लिए सदन का काम-काज स्थगित कर दिया. लोकसभा में भाजपा सांसद विजय कुमार मल्होत्रा ने कहा, "जब तक प्रधानमंत्री आकर ये नहीं बताते कि ऐसे लोगों को मंत्री क्यों बनाया गया और उन्हें हटाने के लिए क्या किया जा रहा है, लोकसभा और राज्यसभा में हमारी कार्रवाई जारी रहेगी." सत्तारुढ़ गठबंधन के सांसद राजग गठबंधन के विरोध को दोहरे मानदंड बताते हुए अपना निशाना लालकृष्ण आडवाणी पर साध रहे हैं. आडवाणी पर छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिराने वाली भीड़ को उकसाने के आरोप लगे थे जिन्हें पिछले साल एक अदालत ने ख़ारिज कर दिया था. बाबरी मस्जिद को गिराए जाने की जाँच लिब्रहान आयोग अब भी कर रहा है. बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद देश के कई अनेक हिस्सों में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे. जल संसाधन राज्य मंत्री जय प्रकाश नारायण ने कहा, "देश को सांप्रदायिक दंगों की आग में झोंक देना बहुत ही गंभीर अपराध है. लेकिन भाजपा दोहरे मानदंड अपना रही है." लेकिन राजग के संयोजक जॉर्ज फ़र्नांडीस विपक्ष के विरोध को न्यायसंगत बताते हुए अपनी बात पर अड़े हैं. "आप क्या सोचते हैं, बलात्कार कोई राजनीतिक अपराध है, सरकारी ख़ज़ाने को लूटना क्या कोई राजनीतिक अपराध है?" राज्य सभा संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में भी यही स्थिति रही. वहाँ काम शुरू होते ही पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोंक-झोंक और नारेबाज़ी हुई. इस पर आधे घंटे के लिए सदन का काम रोकना पड़ा. दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर काँग्रेस नेता कर्ण सिंह ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का प्रस्ताव रखा. मगर भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने प्रस्ताव पर चर्चा से पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मंत्रियों के मामले पर स्पष्टीकरण देने की माँग की. हंगामा बढ़ता गया जिसके बाद उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति भैरों सिंह शेखावत ने कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी. |
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