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करगिल मुद्दा फिर गरमाया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में सत्ताधारी काँग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है पिछली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने करगिल युद्ध के समय महत्वपूर्ण फ़ैसले लेने में देर की जिससे कई सैनिकों की जान गई. केंद्र सरकार को समर्थन देने वाली मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी इस विषय में ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करवाने की माँग की है. उधर भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि काँग्रेस पहले भी करगिल का मुद्दा उठाती रही है और अब ये मुद्दा 'दाग़ी' मंत्रियों को मंत्रिमंडल में शामिल करने के विषय से ध्यान हटाने के लिए उठाया गया है. एक अख़बार में छपी रिपोर्ट का हवाला देते हुए काँग्रेस नेता अश्विनी कुमार ने आरोप लगाया, "देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हुआ. ये मुद्दा संसद में उठाया जाएगा और इसकी पूरी जाँच होगी." उनका कहना था कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने उस कमेटी का गठन किया था जिसकी रिपोर्ट चर्चा में है लेकिन उस रिपोर्ट को दबा दिया गया. उधर भाजपा प्रवक्ता अरुण जेटली का कहना था कि उनकी पार्टी 'दाग़ी' मंत्रियों वाले मुद्दे को आसानी से नहीं छोड़ेगी और यदि काँग्रेस करगिल मुद्दे पर संसद में बहस चाहती है तो वह उसके लिए भी तैयार है. |
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