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अख़बारों में छाए मनमोहन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की ओर से कांग्रेस नेता डॉक्टर मनमोहन सिंह को देश का अगला प्रधानमंत्री नियुक्त करने की ख़बरों को अख़बारों ने काफ़ी दिलचस्प ढंग से छापा है. देश के लगभग हर अख़बार में इसी ख़बर को प्रमुखता दी गई है और अख़बारों का पहला पन्ना इसी से भरा हुआ है. सबसे दिलचस्प सुर्खी एशियन एज की है जो लिखता है 'राज करेगा खालसा'. इसके अलावा राष्ट्रीय सहारा की सुर्खी है 'सोनिया ने मनमोहन के सिर रखा अपना ताज'. हिंदुस्तान ने दो इंच की बैनर हेडलाइन में छापा है 'अब तो मनमोहन'. अमर उजाला की सुर्खी है, 'मुक़द्दर का सिकंदर मनमोहन'. अख़बार लिखता है कि मनमोहन सिंह ने 57 साल पुराना ये मिथक तोड़ दिया है कि ऐसा कोई व्यक्ति प्रधानमंत्री नहीं बन सकता जिसके नाम में अंग्रेज़ी का आर अक्षर नहीं हो. अख़बार ये भी लिखता है कि देश के दो सर्वोच्च पदों पर अब अल्पसंख्यक समुदाय के लोग मौजूद हैं. फ़ाइनेंशियल एक्सप्रेस की सुर्खी है 'डॉक्टर ने चार्ज सँभाला', तो स्टेट्समैन का शीर्षक है 'डॉक्टर सोनिया ने मनमोहन गोली नुस्ख़े में लिखी'. टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने लिखा 'सिंह को बागडोर पकड़ाई गई लेकिन बागडोर पूरी तरह सोनिया के हाथ में'. नवभारत टाइम्स की सुर्खी है 'मनमोहन होंगे देश के नए सरदार'.
बिज़नेस स्टैंडर्ड की ख़बर है कि कांग्रेस सहयोगी दलों को 40 मंत्री पद दे सकती है. हिंदुस्तान टाइम्स ने राहुल गाँधी का साक्षात्कार छापा है जिसमें उन्होंने कहा है, "मेरी माँ खून से गाँधी नहीं है लेकिन अपने एक काम से वह गाँधी बन गई हैं." राहुल गाँधी कहते हैं कि उन्होंने अपनी दादी को 1980 और अपने पिता को 1984 में शपथ लेते देखा है लेकिन उन्हें इतना गर्व कभी नहीं हुआ जितना इस मंगलवार को हुआ जब सोनिया गाँधी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री का पद ठुकराया. इंडियन एक्सप्रेस ने ख़बर छापी है कि अटल बिहारी वाजपेयी विपक्ष के नेता नहीं होंगे और ये ज़िम्मेदारी लालकृष्ण आडवाणी पर होगी. अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि वाजपेयी ने सुषमा स्वराज और उमा भारती के क़दम को पसंद नहीं किया है. |
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