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मीडिया में सोनिया की सराहना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय अख़बारों ने काँग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी के प्रधानमंत्री पद ठुकरा देने के फ़ैसले की सराहना की है. आम तौर पर माना जा रहा है कि सोनिया के इस क़दम से उनका क़द बढ़ा है. मसलन “एशियन एज” कहता है कि सोनिया गाँधी ने पद ठुकरा कर लोगों के दिलों में जगह बना ली है. “टाइम्स ऑफ़ इंडिया” लिखता है कि सोनिया ने सत्ता का मोह छोड़ महानता की ओर क़दम बढ़ाए हैं. लेकिन दूसरी ओर, “दैनिक जागरण” पूछता है – ये अंतरात्मा की आवाज़ है या कुछ और. अख़बार कहता है कि संभव है कि सोनिया गाँधी 272 का आंकड़ा अपने बलबूते पर ही हासिल कर इस पद पर आना चाहती हैं. राजनीति “इंडियन एक्सप्रेस” कहता है कि “विनम्रतापूर्वक प्रधानमंत्री” का पद ठुकरा कर सोनिया ने राजनीति की बिसात पर ज़बरदस्त चाल चल दी है.
अख़बार कहता है कि सोनिया गाँधी ने अपने फ़ैसले से जता दिया है कि वे सत्ता में कुछ नैतिक मूल्यों के कारण हैं वो सत्ता भर के लिए सत्ता की राजनीति नहीं कर रहीं. “राजस्थान पत्रिका” लिखता है कि विदेशी मूल के मुद्दे पर सोनिया गाँधी के संसदीय दल का नेता चुने जाने पर कई राजनेताओं की टिप्पणी शोभनीय नहीं. जब उनको चुनाव लड़ने का अधिकार प्राप्त है और विपक्ष की नेता पद पर कार्य किया जाना स्वीकार है तो प्रधानमंत्री बनने पर क्यों आपत्ति है? “राजस्थान पत्रिका” आगे लिखता है कि विदेशी मूल के मुद्दे पर हमारा संविधान भी कुछ टिप्पणी नहीं करता तो कुछ लोग इस विषय को क्यों उठाते हैं. |
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