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सोनिया फ़ैसले पर अटल, संसदीय दल की फिर बैठक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सोनिया गाँधी ने अपने फ़ैसले पर फिर से विचार करने की पार्टी सदस्यों की माँग नामंज़ूर कर दी है. नया नेता चुनने के लिए संसदीय दल की बैठक हो रही है. सोनिया गाँधी पर दबाव डालने के वास्ते पार्टी की नीति निर्धारक समिति कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्यों ने मंगलवार रात को अपने इस्तीफ़े सौंप दिए थे. कांग्रेस महासचिव अम्बिका सोनी ने दिल्ली में संवाददाताओं को बताया, "हम देश भर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की माँग के साथ हैं कि उन्हें प्रधानमंत्री बनना चाहिए." उन्होंने कहा, " हम दोपहर बाद उनसे मिल रहे हैं. हम उनसे कहेंगे कि जब तक वो अपना फ़ैसला नहीं बदलतीं हम अपने इस्तीफ़े वापस नहीं लेंगे." बाद में पार्टी के एक अन्य महासचिव ऑस्कर फ़र्नांडिस ने पत्रकारों को बताया कि सोनिया गाँधी ने पार्टी नेताओं की माँग को ठुकरा दिया है. इस बीच आम कांग्रेसियों में सोनिया के फ़ैसले को लेकर भारी हताशा का माहौल है. ग़ुस्साए कार्यकर्ताओं ने बुधवार को कांग्रेस मुख्यालय में तोड़फोड़ की. द्रमुक का फ़ैसला इस बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में कांग्रेस की सहयोगी पार्टी द्रमुक ने केंद्र में कांग्रेस की अगुआई वाली सरकार में शामिल होने का फ़ैसला किया है. तमिलनाडु की इस प्रमुख पार्टी के 16 सांसद इस बार निर्वाचित हुए हैं.
इससे पहले सोनिया गाँधी ने द्रमुक नेता एम करुणानिधि से मुलाक़ात की. वह माकपा नेता हरकिशन सिंह सुरजीत से भी मिलीं हैं. माना जाता है कि वह कांग्रेस संसदीय दल के नए नेता के नाम पर सहमति बनाने के लिए सहयोगी दलों के नेताओं से मिल रही हैं. |
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