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नए नेता के नाम पर अटकलें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के प्रधानमंत्री न बनने के फ़ैसले के बाद संभावना व्यक्त की जा रही है कि बुधवार को नए नाम का फैसला हो जाएगा. पार्टी सांसदों के दबाव के बावजूद सोनिया गाँधी ने अपना फ़ैसला बदलने से इनकार कर दिया है. सांसदों ने नया नेता चुनने की ज़िम्मेदारी सोनिया गाँधी को ही सौंप दी है, चर्चा है कि पूर्व वित्त मंत्री मनमोहन सिंह सोनिया गाँधी की पहली पसंद हैं. हालाँकि सोनिया गाँधी ने ज़ोर देकर कहा है कि वे अपना फ़ैसला नहीं बदलेंगी लेकिन पार्टी के कई नेता अब भी उम्मीद लगाए बैठी हैं कि वे प्रधानमंत्री पद स्वीकार करने के लिए राज़ी हो जाएँगी. पार्टी के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने बीबीसी से बातचीत करते हुए उम्मीद ज़ाहिर की कि सोनिया गाँधी अपना फ़ैसला बदल देंगी. उन्होंने कहा, "अगर सोनिया जी मान गईं तो हमारे लिए यह खुशी की बात होगी, हम जश्न मनाएँगे." मंगलवार को दिन भर चली राजनीतिक हलचलों के बाद काँग्रेस संसदीय दल की बैठक में सोनिया गाँधी ने अपने फ़ैसले की घोषणा की. संसदीय दल की बैठक को संबोधित करते हुए सोनिया गाँधी ने कहा कि उन्होंने अपने मन की आवाज़ पर यह फ़ैसला किया है. सोनिया ने कहा, "प्रधानमंत्री का पद कभी भी मेरा लक्ष्य नहीं रहा है. मैंने अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर यह फ़ैसला लिया है." बाद में पार्टी के कई वरिष्ठ सांसदों ने सोनिया गाँधी से मनुहार किया कि वे अपने फ़ैसले पर फिर से विचार करें.
इससे पहले मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने भी पत्रकारों को सोनिया गाँधी के फ़ैसले की जानकारी दी. येचुरी ने कहा, "काँग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने हमसे मुलाक़ात करके यह बताया है कि काँग्रेस संसदीय दल अपना नया नेता चुनने जा रहा है." मंगलवार को सोनिया गाँधी राष्ट्रपति से मिलीं ज़रूर लेकिन सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया, इसके बाद से अटकलें लगाई जाने लगीं कि वे प्रधानमंत्री पद स्वीकार करना नहीं चाहती. |
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