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सहयोगियों ने सोनिया को नेता चुना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में नेहरू-गाँधी ख़ानदान की सदस्या और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की पत्नी सोनिया गाँधी को कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन का नेता चुन लिया गया है और इसी के साथ वह प्रधानमंत्री पद से अब सिर्फ़ एक क़दम दूर रह गई हैं. सोनिया गाँधी के नाम का प्रस्ताव द्रविड़ मुनेत्र कषगम नेता एम करुणानिधि ने किया जबकि राष्ट्रीय जनता दल नेता लालू प्रसाद यादव और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नेता शरद पवार ने उनका समर्थन किया. कांग्रेस नेता मनमोहन सिंह ने बताया कि बैठक में शामिल सभी पार्टियाँ सोनिया गाँधी के नाम पर सहमत थीं. बैठक में मौजूद नेताओं में प्रमुख नाम समाजवादी पार्टी नेता अमर सिंह का रहा. इस तरह ये स्पष्ट हो गया है कि समाजवादी पार्टी भी सोनिया गाँधी को बतौर प्रधानमंत्री स्वीकार करने के लिए तैयार हो गई है. बैठक में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता ज्योति बासु और हरकिशन सिंह सुरजीत के अलावा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी नेता एबी बर्धन भी मौजूद थे. साथ ही पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती, राष्ट्रीय लोकदल नेता अजित सिंह और झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता शिबू सोरेन सहित कई प्रमुख नेताओं ने भी बैठक में हिस्सा लिया.
इस गठबंधन को अब लोकसभा के औपचारिक गठन का इंतज़ार है. लोकसभा के गठन की अधिसूचना जारी होने के साथ ही सोनिया गाँधी राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से मिलकर सरकार के गठन का दावा पेश करेंगी. माना जा रहा है कि सोमवार को ये गठन हो जाएगा और सोनिया गाँधी अपना दावा पेश करेंगी. इस बीच कम्युनिस्ट पार्टियों के सरकार में शामिल होने के बारे में अभी तक कोई फ़ैसला नहीं हुआ है. इन पार्टियों का इस बारे में फ़ैसला भी सोमवार को ही आने की संभावना है. उधर समाजवादी पार्टी का कहना है कि उसका फ़ैसला कम्युनिस्ट दलों के फ़ैसले पर निर्भर होगा. ऐसी भी ख़बरें हैं कि दो कम्युनिस्ट दलों आरएसपी और फ़ॉरवर्ड ब्लॉक ने सरकार में शामिल नहीं होने की बात कही है मगर अंतिम फ़ैसला माकपा के रुख़ पर ही निर्भर होगा क्योंकि वही गठबंधन का सबसे बड़ा दल है. |
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