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शनिवार, 15 मई, 2004 को 16:25 GMT तक के समाचार
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सोनिया प्रधानमंत्री तो मेरा इस्तीफ़ा: सुषमा
सुषमा स्वराज
सुषमा स्वराज ने इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला किया
भारतीय जनता पार्टी की तेज़-तर्रार महिला सांसद सुषमा स्वराज ने कांग्रेस नेता सोनिया गाँधी के प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं के बाद इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला किया है.

बीबीसी हिंदी से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि वह और उनके पति स्वराज कौशल सोनिया गाँधी के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद इस्तीफ़ा दे देंगे.

पति-पत्नी इस समय राज्यसभा के सांसद हैं और सुषमा स्वराज वाजपेयी सरकार में स्वास्थ्य के साथ ही संसदीय कार्य मंत्रालय भी सँभाल चुकीं हैं.

उन्होंने कहा, "ये गहरी वेदना से लिया गया फ़ैसला है क्योंकि ये 100 करोड़ भारतीयों का अपमान है."

सुषमा ने ये फ़ैसला तब किया है जब सोनिया गाँधी को कांग्रेस संसदीय दल ने नेता चुन लिया है.

उनके नेता चुने जाने के साथ ही ये तय हो गया है कि प्रधानमंत्री पद उन्हीं के पास जा रहा है.

स्वराज का कहना है कि वह राज्यसभा की सदस्यता इसलिए छोड़ रही हैं क्योंकि उन्हें सदन में सोनिया गाँधी को 'माननीय प्रधानमंत्री' कहकर संबोधित करना होगा और उन्हें ये गवारा नहीं होगा.

उनका कहना था कि जो पार्टियाँ अब सोनिया गाँधी को समर्थन दे रही हैं वे कांग्रेस के विरोध पर ही चुनकर आए हैं और अब कांग्रेस को समर्थन देकर जनता के साथ विश्वासघात कर रही हैं.

मंज़ूर नहीं

जब उनसे ये पूछा गया कि वह इससे पहले उन्हें जब विपक्ष का नेता स्वीकार कर सकती हैं तो प्रधानमंत्री क्यों नहीं तो उनका कहना था कि बतौर विपक्ष के नेता सोनिया गाँधी के पास कोई गोपनीय फ़ाइल नहीं जाती थी.

 मेरा मन उन्हें कभी प्रधानमंत्री स्वीकार नहीं करता और ये 100 करोड़ भारतीयों का अपमान है. जिस समय वह शपथ लेंगी मैं इस्तीफ़ा दे दूँगी
सुषमा स्वराज

उनका कहना था कि विपक्ष के नेता को देश की गोपनीय सूचनाएँ नहीं मिलतीं जो कि अब सोनिया गाँधी तक जाएँगी.

भाजपा और उसके कुछ सहयोगी दलों को सोनिया गाँधी के विदेशी मूल का होने की वजह से काफ़ी ऐतराज़ है और इन दलों ने आम चुनाव के दौरान भी ये मुद्दा उछाला था.

मगर नतीजों के बाद कांग्रेस का गठबंधन सत्ता के नज़दीक़ आ गया है और वामपंथी दलों के उनके साथ होने से बहुमत का आँकड़ा भी उनके पक्ष में चला गया है.

इन सबको देखते हुए भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को विपक्ष में बैठना होगा.

सुषमा ने कहा, "ये सोनिया गाँधी का व्यक्तिगत मामला नहीं है क्योंकि व्यक्तिगत रूप से तो उनसे मेरे काफ़ी अच्छे संबंध हैं."

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