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सोनिया कुर्सी के नज़दीक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
काँग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी आज अपने सहयोगी दलों के नेताओं से मिल रही हैं. बातचीत के बाद उन्होंने इन नेताओं को अपने आवास 10 जनपथ पर रात्रिभोज के लिए भी बुलाया है. लगभग सभी सहयोगियों ने उन्हें अपना समर्थन पत्र सौंप दिया है. काँग्रेस के प्रमुख सहयोगियों में राष्ट्रीय जनता दल, लोक जनशक्ति पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ़्रंट, डीएमके, पीएमके, तेलंगाना राष्ट्र समिति शामिल हैं. वामपंथी दलों ने पहले ही कह दिया है कि वे सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाए जाने का समर्थन करेंगे. दावा सोनिया गांधी कल यानी सोमवार को राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम से मिल रही हैं और समझा जा रहा है कि वे अपने समर्थकों के पत्र लेकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगी. तमिलनाडु में काँग्रेस की प्रमुख सहयोगी द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम के नेता एम करूणानिधि ने सोनिया गांधी से मुलाक़ात कर उन्हें समर्थन का पत्र सौंप दिया है. उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी अभी सरकार में शामिल नहीं होगी. मगर डीएमके की सहयोगी पार्टी पट्टाली मक्कल काच्चि, पीएमके, ने सरकार में शामिल होने का फ़ैसला किया है. वामपंथी दल
वामपंथी दल अभी तय नहीं कर पाए हैं कि काँग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार को वे बाहर से समर्थन देंगे या स्वयं सरकार में शामिल होंगे. सीपीएम की सर्वोच्च निर्णायक समिति, केंद्रीय समिति, की दिल्ली में बैठक हो रही है जिसमें इस महत्वपूर्ण प्रश्न पर विचार किया जा रहा है. पार्टी की पोलित ब्यूरो की भी कल बैठक हुई थी और पार्टी महासचिव हरकिशन सिंह सुरजीत ने कहा था कि पार्टी के रूख़ का एलान सोमवार को किया जाएगा. बताया जा रहा है कि पार्टी के केरल से आए नेता कांग्रेस सरकार में शामिल होने का समर्थन नहीं कर रहे. उनका मानना है कि सरकार में शामिल होने की सूरत में वामपंथी सत्ता वाले प्रदेशों केरल और पश्चिम बंगाल में सीपीएम की स्थिति कमज़ोर पड़ सकती है. दोनों राज्यों की प्रादेशिक राजनीति में सीपीएम और कांग्रेस एक-दूसरे के प्रमुख विरोधी हैं. सपा और बसपा उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 35 सीटें जीतनेवाली समाजवादी पार्टी और 19 सीटें लेकर दूसरे नंबर पर रहनेवाली बहुजन समाज पार्टी का रूख़ क्या रहेगा, इसे लेकर भी भ्रम बना हुआ है. दोनों ही पार्टियों ने कह रखा है कि वह कांग्रेस सरकार को समर्थन देने के लिए तैयार हैं मगर कांग्रेस ने उनकी पेशकश का कोई जवाब ही नहीं दिया है. रविवार को सोनिया गांधी के घर पर रात्रिभोज में ना तो सपा नेता मुलायम सिंह यादव और न ही बसपा नेता मायावती को बुलाया गया है. मुलायम सिंह यादव तो रविवार को दिल्ली से ये कहते हुए लखनऊ लौट गए कि वे अपने सहयोगियों के साथ विचार कर ही आगे कोई क़दम उठाएँगे. |
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