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सोनिया ही बनेंगी प्रधानमंत्री | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कांग्रेस संसदीय दल ने शनिवार को सोनिया गाँधी को अपना नेता चुन लिया. इस तरह उनके प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ़ हो गया है और रही-सही अटकलों पर भी विराम लग गया है कि सोनिया शीर्ष पद पर अपनी पसंद के किसी और व्यक्ति को बिठाने का फ़ैसला कर सकती हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता मनमोहन सिंह ने पत्रकारों को बताया कि सोनिया को सर्वसम्मति से संसदीय दल का नेता चुन लिया गया और किसी अन्य व्यक्ति का नाम चर्चा के लिए सामने नहीं आया. सोनिया के नाम का प्रस्ताव प्रणब मुखर्जी ने रखा और उसका समर्थन महावीर प्रसाद यादव ने किया. संविधान के प्रावधानों के अनुसार संसद में बहुमत दल का नेता ही प्रधानमंत्री होता है और सोनिया का संसदीय दल का नेता बनना प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने की ओर अगला क़दम है. कांग्रेस को समर्थन देने वाले वामपंथी दलों, राष्ट्रीय जनता दल और बहुजन समाज पार्टी ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि उन्हें सोनिया के प्रधानमंत्री बनने पर कोई एतराज़ नहीं है. नेहरू-गाँधी परंपरा कांग्रेस संसदीय दल की बैठक संसद के केंद्रीय कक्ष में हुई जिसमें काफ़ी जोश और ख़ुशी का माहौल दिखाई दिया. कांग्रेस के सांसदों ने अमेठी से चुने गए राहुल गाँधी बहुत ही गर्मजोशी से तालियाँ बजाकर स्वागत किया, राहुल गाँधी ने जीत की बधाई देते हुए अपनी माँ को गुलाब का फूल भेंट किया.
कांग्रेस के सांसदों ने सोनिया गाँधी को बधाई देने में जितना जोश दिखाया उतना ही राहुल गाँधी से मिलने और बात करने में. सोनिया गाँधी ने कहा कि देश की जनता ने उन्हें जो ज़िम्मेदारी सौंपी है उसका वे पूरी तरह निर्वाह करेंगी. राहुल गाँधी ने केंद्रीय कक्ष में आगे की कुर्सी पर बैठे और उन्हें बधाई देने के लिए अर्जुन सिंह, प्रणब मुखर्जी और मनमोहन सिंह जैसे नेता अपनी सीटों से उठकर आए. राहुल गाँधी ने कहा कि वे पार्टी और अपने संसदीय क्षेत्र के लिए पूरी लगन और निष्ठा से काम करेंगे. |
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