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भारतीय अख़बारों में 'सोनिया शाइनिंग' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लोकसभा चुनाव में सोनिया गाँधी के नेतृत्व वाले काँग्रेस गठबंधन को मिली शानदार जीत की ख़बरों से भारतीय अख़बार पटे पड़े हैं. सभी अख़बारों ने बैनर हेडिंग में सोनिया काँग्रेस की जीत की ख़बर छापी है. साथ में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के फ़ील गुड नारे की हवा निकलने पर भी अख़बारों ने चुटकी ली है. अटल बिहारी वाजपेयी की अगुआई वाले गठबंधन के नारे इंडिया शाइनिंग की तर्ज पर अंग्रेज़ी अख़बार स्टेट्समैन ने शीर्षक लगाया है- 'सोनिया शाइनिंग'. अंग्रेज़ी दैनिक टाइम्स ऑफ़ इंडिया का रोचक शीर्षक है-'किंग काँग्रेस क्वीन सोनिया'. अख़बार ने एनडीए के हार के कारणों का विश्लेषण करने की कोशिश की है. साथ में अख़बार ने चुनावी विश्लेषकों के दावे की भी खिल्ली उड़ाई है. हिंदू अख़बार के बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है-'सोनिया सेट टू बिकम पीएम' यानी सोनिया प्रधानमंत्री पद संभालने को तैयार. अख़बार ने पहले पृष्ठ पर लिखे अपने संपादकीय में कहा है कि कुछ दिनों पहले तक काँग्रेस को सिरे से ख़ारिज कर दिया गया था. 'शॉक एंड ऑसम' हिंदुस्तान टाइम्स का शीर्षक है- 'शॉक एंड ऑसम' यानी चकित करने वाले नतीजे. अख़बार के संपादक वीर सांघवी ने पहले पन्ने पर लिखे अपने आलेख में निवर्तमान प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भूरि-भूरि प्रशंसा की है. उन्होंने लिखा है कि इतिहास वाजपेयी को एक बेहतरीन प्रधानमंत्री के रूप में याद रखेगा. हिंदी अख़बार हिंदुस्तान ने लिखा है- वाजपेयी आउट, सोनिया होंगी प्रधानमंत्री. नवभारत टाइम्स की सुर्ख़ी है- सोनिया बनीं चौदहवीं का चाँद. जबकि जनसत्ता का कहना है- नारा भाजपा का फ़ील गुड काँग्रेस का. जनसत्ता के पहले पन्ने पर संपादक ओम थानवी का लेख है- भारत उदय भाजपा अस्त. 'यू आर माई सोनिया' इकोनॉमिक टाइम्स की दिलचस्प हेडिंग है- कह दो ना यू आर माई सोनिया.
इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है एनडीए श्रिंकिंग यानी एनडीए सिकुड़ रहा है. अहमदाबाद से पलक नंदी ने लिखा है कि पहली बार नरोड़ा पटिया के लोग अपने को अकेला नहीं महसूस कर रहे हैं. दैनिक जागरण की टिप्पणी है अति आत्मविश्वास, अकड़ और सत्ता मद ले डूबा भारतीय जनता पार्टी को. पॉयनियर ने पहले ही पृष्ठ पर संपादकीय लिख पर पूछा है कि ऐसा क्यों हुआ. अमर उजाला ने लिखा है आख़िर तेरह के अशुभ अंक ने अपना असर दिखा ही दिया. राष्ट्रीय सहारा का शीर्षक भी कुछ इसी तरह का है- इस बार 13 का अंक गच्चा दे गया. |
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