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'सोनिया का चुना जाना दुर्भाग्यपूर्ण' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी ने सोनिया गांधी के काँग्रेस संसदीय पार्टी का नेता चुने जाने के फ़ैसले को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया है. पार्टी के महासचिव और प्रवक्ता मुख़्तार अब्बास नक़वी ने कहा,"काँग्रेस किसी भी व्यक्ति को अपना नेता चुनने के लिए स्वतंत्र है मगर ये वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है कि वह एक अरब की आबादी में से भारतीय मूल के किसी व्यक्ति को अपना नेता नहीं चुन पाई". आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी भले ही अटल बिहारी वाजपेयी के करिश्माई नेतृत्व या 'फ़ीलगुड' के नारे को नहीं भुना पाई हो मगर उसने 'विदेशी मूल' का मसला नहीं छोड़ा है. उसका अब भी यही मानना है कि देश के उच्च सांवैधानिक पदों पर विदेशी मूल के लोगों को नहीं बैठना चाहिए. चुनाव के नतीजे आने के बाद पहले संवाददाता सम्मेलन में भाजपा अध्यक्ष एम वेंकैया नायडू ने कहा कि विपक्ष का नेता कौन होगा इसका फ़ैसला नई सरकार के गठन के बाद ही होगा. उन्होंने ये भी कहा कि 'हार का ठीकरा' किसी एक व्यक्ति के सिर पर नहीं फोड़ा जाएगा. लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद पार्टी के शीर्ष नेताओं की नई दिल्ली में बैठक हुई. निवर्तमान प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के आवास पर हुई संसदीय बोर्ड की इस बैठक में कई शीर्ष नेता शामिल हुए.
नायडू ने विदेशी मूल के मुद्दे पर कहा, "हम व्यक्तिगत तौर पर सोनिया गाँधी के विरोधी नहीं हैं मगर हमारा मानना यही है कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या प्रधानमंत्री जैसे पद भारतीय मूल के लोगों के पास ही रहने चाहिए." जब उनसे ये पूछा गया कि क्या भाजपा संसद में सोनिया गाँधी का बहिष्कार करेगी तो उनका कहना था कि ये उनकी संस्कृति नहीं है और उनकी पार्टी को जनता का फ़ैसला स्वीकार है. केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक के बारे में उन्होंने कहा कि नेताओं ने चुनाव नतीजों पर विचार किया और आम सहमति इसी बात पर थी कि परिणामों का अध्ययन गहराई से किया जाना चाहिए. इस बात की अटकलें भी काफ़ी ज़ोरों पर हैं कि वाजपेयी विपक्ष के नेता का पद स्वीकार नहीं करेंगे. मगर नायडू ने कहा कि पहले सरकार का गठन हो जाए इसके बाद इस पर फ़ैसला हो जाएगा. |
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