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हार की कई वजहें होती हैं - महाजन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी के महासचिव और एनडीए के प्रमुख चुनाव संचालक प्रमोद महाजन का कहना है कि हार का कोई एक कारण नहीं होता, बहुत से कारण होते हैं और उनको पहचानना होगा. उन्होंने यह मानने से इनकार किया कि इंडिया शाइनिंग और फ़ीलगुड का नारा विफल हो गया. महाजन ने बीबीसी से हुई विशेष बातचीत में कहा, ''देश में 67 करोड़ से भी अधिक मतदाता हैं और इन चुनावों के परिणाम हारने वाले के लिए भी अप्रत्याशित रहे हैं और जीतने वाले के लिए भी और मतदाता के लिए भी.'' उन्होंने कहा कि ऐसे परिणामों के लिए कोई एक कारण नहीं हो सकता. उनका कहना था, ''जीत के कई पिता होते हैं और हार के कई कारण.'' उन्होंने कहा कि यह समय जीतने वालों के लिए, हारने वालों के लिए और मीडिया के लिए भी चिंतन का है कि आख़िर उनका आकलन किस तरह ग़लत हो गया. प्रमोद महाजन ने इस बात से इनकार किया कि भाजपा के अपने मुद्दों को छोड़ देने का नुक़सान पार्टी को हुआ. उनका कहना था कि यदि इससे फ़ायदा होने वाला होता तो गुजरात में पार्टी को नुक़सान नहीं होता क्योंकि वहाँ तो पार्टी अपने पूरे एजेंडे के साथ काम कर रही थी. नहीं टूटेगा एनडीए उन्होंने एनडीए के बिखर जाने की संभावनाओं को भी ग़लत ठहराया और कहा कि अब एनडीए में जो लोग हैं उन सब को राज्यों में कांग्रेस विरोध की राजनीति करना है इसलिए वे एनडीए छोड़कर कहीं जाने वाले नहीं हैं. सोनिया गाँधी के विदेशी मूल को मुद्दा बनाए जाने से नुक़सान की आशंका पर उन्होंने कहा कि यदि इसका नुक़सान होना होता तो 99 के चुनाव में भी हो जाता और पिछले विधानसभा चुनावों में भी. एनडीए के चुनाव प्रभारी प्रमोद महाजन ने यह भी मानने से इनकार किया कि उनका इंडिया शाइनिंग और फ़ीलगुड का नारा विफल हो गया. उनका कहना था कि वे यह भी कह सकते हैं कि यदि यह नारा नहीं होता तो हो सकता है कि इससे भी बुरी स्थिति होती. यही तर्क उन्होंने समय से पहले चुनाव करवाने के बारे में भी दिया. |
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