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दिल्ली में नई सरकार के गठन पर बैठकों का दौर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में चौदहवीं लोकसभा के नतीजे आने के बाद नई सरकार बनाने की क़वायद तेज़ हो गई है. प्रधानमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे चल रही काँग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने अपने सहयोगी दलों से बातचीत शुरू कर दी है. इसी क्रम में राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने काँग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मुलाक़ात की. काँग्रेस के कई नेता वामपंथी दलों से भी लगातार संपर्क में हैं जो नई सरकार के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं. समाजवादी पार्टी के महासचिव अमर सिंह ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी नेता हरकिशन सिंह सुरजीत से मुलाक़ात की है. लेकिन उन्होंने अभी समाजवादी पार्टी की रणनीति का खुलासा नहीं किया है. लोकसभा चुनाव के नतीजों में काँग्रेस की अगुआई वाले गठबंधन को सबसे ज़्यादा 217 सीटें मिलीं हैं. जबकि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को सिर्फ़ 187 सीटों से ही संतोष करना पड़ा है. इन चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही वामपंथी पार्टियों को क़रीब 60 सीटें मिलीं हैं और उन्होंने काँग्रेस की अगुआई वाली सरकार को समर्थन देने की घोषणा भी कर दी है. काँग्रेस का रुख़ वैसे काँग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने गुरुवार को एक संवाददाता सम्मेलन में यह कहा था कि आम तौर पर संसदीय दल का नेता ही प्रधानमंत्री होता है. काँग्रेस पार्टी अपने संसदीय दल का नेता चुनने के लिए 15 मई को बैठक कर रही है. प्रधानमंत्री पद के लिए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी को सहयोगी दलों के समर्थन पर पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आज़ाद ने स्पष्ट किया कि सबसे ज़्यादा सीटें काँग्रेस पार्टी को मिली हैं इसलिए काँग्रेस का नेता ही प्रधानमंत्री बनना चाहिए और काँग्रेस की नेता सोनिया गाँधी हैं. लेकिन अभी भी काँग्रेस गठबंधन की कई सहयोगी पार्टियाँ और उन्हें समर्थन देने की घोषणा करने वाले दलों ने सरकार में शामिल होने के बारे में अपना रुख़ साफ़ नहीं किया है. राजधानी दिल्ली में बैठकों का दौर इसी मुद्दे पर पार्टियों की रणनीति को लेकर चल रहा है. उत्तर प्रदेश में सबसे बड़े दल के रूप में उभरने वाली समाजवादी पार्टी भी अपना अगला क़दम तय करने के लिए बैठक कर रही है. वैसे पार्टी महासचिव अमर सिंह ने काँग्रेस को अपना समर्थन देने का संकेत गुरुवार को दे दिया था लेकिन इस मुद्दे पर पार्टी का रुख़ बैठक के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा. |
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