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सोनिया की जीत पर इतालवियों की राय | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी और तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता ने तो सोनिया के विदेशी मूल को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश की ही लेकिन इटली के अख़बार और पत्रकार भी उन्हें गांधी परिवार की सदस्य से ज़्यादा एक इतालवी के रूप में ही पेश कर रहे हैं. इटली के अख़बार कोरियरा डेला सेरा की हेडलाइन के अनुसार, "इतालवी सोनिया गांधी की जीत." उससे भी एक कदम आगे बढ़ा है अख़बार ला रिपब्लिका. अख़बार की हेडलाइन है—सोनिया गांधी : एक इतालवी की भारत में जीत. उनसे दिल्ली में मिलने गए दो इतालवी पत्रकारों ने तो यहां तक पूछ डाला एक इतालवी होने के नाते इस जीत के बाद उन्हें कैसा महसूस हो रहा है. लेकिन विदेशी मूल के मामले पर बीजेपी के आक्रमणों को काफ़ी समय से झेल रहीं सोनिया ने मामले को तुरंत सँभाला.
जवाब दिया, "मैं इतालवी नहीं हूं, भारतीय हूं." लेकिन इससे इटली के लोगों के जोश में कोई कमी नहीं आई है. वहाँ के विदेश मंत्रालय में काम कर रहीं मार्गरिटा बोनिवर कहती हैं, "आख़िर एक इतालवी महिला प्रधानमंत्री के पद तक पहुंच ही गई." आम लोगों में उनकी जीत को इटली की उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है. एक यूथ सेंटर में काम कर रहे 30 वर्षीय गिलबर्टों फुल्वी कहते हैं, "ये सुनकर बहुत अच्छा लग रहा है कि कोई इतालवी किसी ऐसे देश का नेता बन जाए जो इतनी दूर है." और फिर अगली ही सांस में कहते हैं, "सोचिए, क्या इटली में कोई विदेशी प्रधानमंत्री बन सकता है." इस खुशी का इज़हार वहाँ के लोग सोनिया के लिए बधाई संदेश भेजकर भी कर रहे हैं. बधाई देने वालों में उनके शहर ओवासान्यो के मेयर कार्लो मरोनी भी हैं. और बधाई संदेश में उन्होंने लिखा है, "एक सह नागरिक की जीत पर ओवासान्यो प्रशासन की ओर से हार्दिक बधाई." लेकिन वहाँ उनके परिवार की ओर से कुछ भी नहीं कहा गया है क्योंकि उन्होंने कभी भी सोनिया के राजनीतिक करियर पर कोई बयान नहीं दिया है. |
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