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काबुल में विदेशियों को पत्थरों से मारा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़गानिस्तान की राजधानी काबुल में कुछ अज्ञात लोगों ने रविवार को दो विदेशियों को पत्थर मार कर मार डाला. अफ़ग़ान सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि दोनों व्यक्ति पश्चिमी देशों के थे और उनमें से एक के पास स्विटज़रलैंड का पासपोर्ट था. हत्या के कारणों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है. अफ़गानिस्तान में तालेबान शासन के ख़त्म होने के बाद से इस तरह की ये पहली घटना है. गृह मंत्रालय के प्रवक्ता लुतफ़ुल्ला मशाल ने बताया है कि दोनों विदेशियों के शव काबुल के पश्चिम में चेलसितून के आवासीय इलाक़े में एक प्राचीन उद्यान में मिले. दोनों विदेशियों ने स्थानीय अफ़गान लिबास पहन रखा था. प्रवक्ता के अनुसार उन्हें देख कर ये बात साफ़ लग रही थी कि उनकी हत्या पत्थर मार कर की गई थी. उन दोनों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है. एक स्थानीय पुलिस अधिकारी ने बीबीसी को बताया है कि उन्हें ऐसा लगता है कि दोनों विदेशी उसी इलाक़े में किसी अफ़गान परिवार के साथ रह रहे थे. वहाँ रहने वाले लोग अपेक्षाकृत रूढ़ीवादी माने जाते हैं. पुलिस अधिकारी ने ये भी कहा कि इस घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जाँच पड़ताल की जा रही है. लेकिन अभी तक इस सिलसिले में किसी को गिरफ़्तार नहीं किया गया है. पत्थर मार कर किसी की हत्या करने को बहुत से इस्लामी देशों में अवैध घोषित कर दिया गया है लेकिन अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के कुछ अधिक रूढ़ीवादी क़बायली इलाक़ों में बलात्कार और विवाहेतर संबंधों जैसे मामलों में सज़ा के तौर पर पत्थर मार कर जान लेने की ये प्रथा अब भी लागू है. पूर्व तालेबान शासन ने नैतिकता से जुड़े कुछ अपराधों के लिए इस तरह की सज़ा को एक क़ानूनी इस्लामी सज़ा घोषित कर दिया था. लेकिन कोई भी व्यक्ति निजी स्तर पर इस तरह की सज़ा नहीं दे सकता था और यह क़ानूनी व्यवस्था का हिस्सा है. |
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