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सोमवार, 03 मई, 2004 को 14:39 GMT तक के समाचार
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नेपाल में नरेश विरोधी रैली पर लाठी चार्ज
नेपाल में नरेश विरोधा प्रदर्शन
नरेश विरोधी प्रदर्शन एक साल से चल रहे हैं
नेपाल में नरेश के ख़िलाफ़ हो रहे प्रदर्शनों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुई हैं जिनमें एक सौ से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं जिनमें कुछ पुलिस कर्मी भी हैं.

एक हज़ार से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार भी किया गया है.

नरेश के विरोध में शुरू हुए प्रदर्शनों को सोमवार को एक साल पूरा हो गया जिसके अवसर पर यह बड़ी रैली निकालने की तैयारी की गई थी.

राजधानी काठमांडु में जब प्रदर्शकारियों ने रत्ना पार्क में इकट्ठा होने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की जिसके बाद दोनों पक्षों में जमकर झड़पें हुईं.

रत्ना पार्क नरेश महल के नज़दीक ही है.

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस छोड़ी और लाठी चार्ज भी किया.

जवाब में प्रदर्शनकारियों ने भी पुलिस पर पथराव किया.

इससे पहले पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला और पूर्व उपप्रधानमंत्री और यूनाइटेड मार्क्सवादी लेनिनवादी पार्टी के नेता माधव कुमार नेपाल को कुछ देर के लिए गिरफ़्तार कर लिया था.

ये दोनों नेता सोमवार को रत्ना पार्क में इस रैली को संबोधित करने वाले थे जबकि सरकार ने इस रैली को ग़ैरक़ानूनी घोषित कर दिया था.

एहतियात

गृह मंत्री कमल थापा ने जल्दबाज़ी में बुलाए गए संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इन दोनों नेताओं को एहतियात के तौर पर कुछ देर के लिए गिरफ़्तार किया गया था ताकि हिंसा फैलने से रोकी जा सके.

सरकार का कहना है कि पिछले महीने ख़ुफ़िया सूचनाएं मिलने के बाद इस तरह की रैली पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.

नेपाल में नरेश विरोधी प्रदर्शन

कमल थापा ने कहा कि सोमवार की रात से यह प्रतिबंध हटाया जा रहा है, हालाँकि उन्होंने आशंका ज़ाहिर की है कि इस तरह की रैलियों में माओवादी विद्रोही भी घुस सकते हैं.

नेपाली कांग्रेस और यूनाइटेड मार्क्सवादी-लेनिनवादी कम्यूनिस्ट पार्टी दो प्रमुख दल है जो नरेश ज्ञानेन्द्र का तब से विरोध कर रहे हैं जब 2002 में नरेश ने चुनी हुई सरकार को बर्ख़ास्त करके अधिकार अपने हाथ में ले लिए थे.

तब से संसद भंग चल रही है और भंग संसद के दल माँग कर रहे हैं कि संसद को बहाल करके एक सर्वदलीय सरकार बनाई जानी चाहिए.

पिछले एक महीने से हर दिन रैलियाँ आयोजित की जा रही हैं और इन रैलियों में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार और रिहा किया जा चुका है.

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