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'प्रदर्शनकारी अमानवीय स्थिति में" | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल के मानवाधिकार संगठन ने प्रदर्शनकारियों के प्रति प्रशासन के रवैए की निंदा की है. सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शनों में 2000 लोग गिरफ़्तार किए गए हैं. सरकार का दावा है कि उन्होंने गिरफ़्तार लोगों में से क़रीब 300 लोगों को तुरंत छोड़ दिया था. देश के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का कहना है कि है कि गिरफ़्तार किए गए लोगों को बिना खाना-पानी दिए अमानवीय स्थिति में रखा गया है. नेपाल नरेश के प्रति विरोध जताने और लोकतंत्र बहाली की माँग के लिए वहाँ विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने अक्तूबर 2002 में संसद और मंत्रिमंडल को भंग करते हुए अपने मनपसंद लोगों को महत्वपूर्ण पद देना शुरू कर दिया था. प्रतिबंध सार्वजनिक रैलियों पर लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद रविवार को भी विरोध प्रदर्शन जारी है और जारी है उनकी धर-पकड़ भी. नेपाल सरकार के अनुसार शुक्रवार को विपक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं सहित कुल 945 लोगों को `सुरक्षा कारणों ' से गिरफ़्तार किया गया था लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया. नेपाल के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी अधिकारी गिरफ़्तार किए गए लोगों को खाने-पीने के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं से भी महरूम रख रहे हैं. आयोग ने सरकार से मानवाधिकारों का पालन करने की अपील की. नेपाल सरकार का कहना है कि उन्होंने रैलियों पर इसलिए पाबंदी लगाई है क्योंकि उन्हें लगता है कि इसे माओवादी विद्रोहियों का समर्थन हासिल है. नेपाल में राजतंत्र के ख़िलाफ़ पिछले आठ साल से माओवादी आंदोलन चला रहे हैं. इसमें अब तक 8000 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं. |
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