| भाजपा के खेमे में सर्वेक्षणों की समीक्षा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सोमवार को आए मतदान सर्वेक्षणों ने भारतीय जनता पार्टी के ख़ेमे में खलबली मचा दी है. इन सर्वेक्षणों में कहा गया है कि भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलना काफ़ी मुश्किल होगा और पिछली लोकसभा के मुक़ाबले उनकी सीटों की संख्या में कमी आएगी. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इस सिलसिले में मंगलवार को एक बैठक की जिसमें गठबंधन के प्रदर्शन की समीक्षा की गई और रणनीति पर पुनर्विचार किया गया. जनमत सर्वेक्षणों में कहा गया है कि एनडीए गठबंधन बहुमत से 15-20 सीटें पीछे रह सकता है जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को पिछले चुनाव के मुक़ाबले पचास सीटों तक का फ़ायदा हो सकता है. हालांकि कांग्रेस नेतृत्व वाला गठबंधन भी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं होगा लेकिन एनडीए के लिए भी सरकार बनाना मुश्किल हो जाएगा. मतदान के बाद होने वाले सर्वेक्षण भारत में बहुत विश्वसनीय नहीं रहे हैं लेकिन पाँच टेलीविज़न चैनल अपनी भविष्यवाणियों में बड़े अंतर के बावजूद ये ज़रूर कह रहे हैं कि एनडीए को नुक़सान होगा. ये सर्वेक्षण सही हों या ग़लत, उन्होंने देश भर में सनसनी फैला दी है, मुंबई का शेयर बाज़ार मंगलवार को साढ़े तीन प्रतिशत तक गिर गया जबकि सुबह के सभी अख़बारों ने इन सर्वेक्षणों को अपनी पहली ख़बर बनाया है. ताक़त झोंकी इस बीच पाँच मई को होने वाले मतदान को देखते हुए राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताक़त झोंक दी है. पाँच मई को राजस्थान की सभी 25 सीटों पर मतदान होना है इसलिए सोनिया गाँधी मंगलवार को वहाँ मौजूद थीं. दूसरी ओर, प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश में थे जहाँ 80 में से 30 सीटों के लिए मतदान पाँच मई को होना है, प्रधानमंत्री ने कहा है कि इन सर्वेक्षणों को अधिक महत्व नहीं दिया जाना चाहिए. प्रधानमंत्री वाजपेयी ने कहा, "हमें पूरा विश्वास है कि हमें जनता वोट देगी ताकि हम देश के भविष्य को एक ठोस शक्ल दे सकें और भारत महान देश बन सके." एनडीए का दावा रहा है कि भारत में खुशहाली की लहर चल रही है, जबकि कांग्रेस पार्टी का कहना रहा है कि यह दावा पूरी तरह ग़लत है. |
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