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कई दिलचस्प मुक़ाबले हैं छत्तीसगढ़ में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मंगलवार की शाम जब छत्तीसगढ़ के शहरों और गाँवों की सड़कों पर उड़ रही धूल बैठी तब यहाँ की सभी ग्यारह सीटों पर चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों का भविष्य इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में क़ैद हो चुका है. पहले चरण में हुए मतदान में नए राज्य छत्तीसगढ़ की सभी ग्यारह सीटें भी शामिल हैं. नए राज्य में पहली बार हुए लोकसभा चुनाव का माहौल शेष देश से कुछ अलग नहीं दिखता. सिवाय इसके कि नक्सलियों ने दो लोकसभा क्षेत्रों में लोगों से चुनाव का बहिष्कार करने को कहा है. भारतीय जनता पार्टी ने यहाँ भी विकास का नारा लगाकर अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर वोट माँगा है. हालत यह है कि कई सीटों पर लोग फूल छाप पर वोट देने की बात तो करते रहे हैं लेकिन वे सिर्फ़ अटल बिहारी वाजपेयी को जानते हैं अपने संसदीय क्षेत्र के उम्मीदवार को नहीं. दूसरी ओर छत्तीसगढ़ की सभी ग्यारह सीटों पर कांग्रेस के हर उम्मीदवार को अपने दम पर अपने नाम और छवि पर ही चुनाव लड़ना पड़ा है. यानी कांग्रेस के हर प्रत्याशी का मुक़ाबला सीधे अटल बिहारी वाजपेयी से ही है. इस मैदान में सोनिया गाँधी का कोई नामलेवा ही नहीं है. ग्यारह सीटें पिछली लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने ग्यारह में से आठ सीटें जीतकर कांग्रेस को सिर्फ़ तीन सीटों में समेट दिया था.
यदि चुनावी सर्वेक्षणों को देखें तो कहा जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की लहर है और वह फिर अपने पुराने चुनावी परिणाम को दोहराएगी या उससे भी अच्छा प्रदर्शन करेगी. लेकिन स्थानीय पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक इस आकलन से सहमत होते हुए नहीं दिखते. देशबंधु अख़बार समूह के संपादक सुनील कुमार कहते हैं, ‘हो सकता है पिछले चुनावों की तरह इस बार भी छत्तीसगढ़ में चुनावी सर्वेक्षण ग़लत साबित हों.’ उनका कहना है कि हो सकता है कि कांग्रेस अपनी पुरानी तीन सीटें बचा न पाए लेकिन वह दूसरी तीन सीटों पर जीत सकती है या ज़्यादा सीटें भी ला सकती है. वैसे मैदान में मतदाताओं से बात करने के बाद लगता नहीं कि छत्तीसगढ़ की सभी ग्यारह सीटों पर भाजपा के लिए ‘वाकओवर’ की स्थिति है. दिलचस्प मुक़ाबले महासमुंद में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी दुर्घटना में घायल होने के बाद मुंबई के अस्पताल के बिस्तर से चुनाव लड़ रहे हैं. पूर्व कांग्रेस नेता विद्याचरण शुक्ल की मौजूदगी ने इस मुक़ाबले को दिलचस्प बना रखा है.
दूसरा दिलचस्प चुनाव जाँजगीर का है जहाँ से प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला चुनाव लड़ रही हैं. उनके ख़िलाफ़ यहाँ के निवर्तमान सांसद और प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष चरण दास महंत मैदान में हैं. तीसरा मुक़ाबला रायपुर में है जहाँ तीन बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके श्यामाचरण शुक्ल के सामने केंद्रीय मंत्री रमेश बैस चुनाव मैदान में हैं. बैस पिछले चार बार से यहाँ से चुनाव जीतते आए हैं. इसके अलावा डोंगरगाँव से मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं. नक्सली हिंसा उधर नक्सलियों ने कम से कम दो लोकसभा सीटों, बस्तर और कांकेर में, हर बार की तरह इस बार भी चुनाव बहिष्कार की अपील कर रखी थी. लेकिन इस बार बहिष्कार को लागू करवाने के लिए उन्होंने हिंसा की घटनाएँ तेज़ कर दीं. पुलिस अधिकारी मानते हैं कि इस बार मतदान कम से कम बस्तर में तो शांतिपूर्ण होने की संभावना कम ही है. वैसे भी बस्तर में पिछले कुछ दिनों से हिंसा की घटनाएँ लगातार हो ही रही हैं. |
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