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एनडीए का चुनावी घोषणापत्र जारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में सत्तारुढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने सरकार चलाने के लिए अगले पाँच साल के लिए अपना साझा कार्यक्रम गुरूवार को जारी किया जिसमें देश को विकास, सुशासन और शांति के मार्ग पर ले चलने का वादा किया गया है. इस कार्यक्रम में मंदिर मुद्दे पर खुलकर तो कुछ नहीं कहा गया है लेकिन इस मुद्दे पर कुछ भी शामिल किया जाना अपने आप में महत्वपूर्ण है. इस कार्यक्रम में कहा गया है कि अयोध्या विवाद पर सभी पक्षों को अदालत का निर्णय मानने के लिए तैयार रहना चाहिए. कार्यक्रम में एक क़दम आगे बढ़ते हुए यह भी कहा गया है कि अयोध्या विवाद का हल सभी पक्षों के बीच आम सहमति बनाकर करने की कोशिश करनी चाहिए. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के संयोजक जॉर्ज फ़र्नांडीस ने बाद में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर बनना चाहिए इस पर तो किसी को ऐतराज़ ही नहीं है लेकिन यह आम सहमति से बने तो अच्छा है. यह कार्यक्रम जारी करने के बाद प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पत्रकारों से कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने 1999 में जो वादे किए थे - क़रीब-क़रीब सभी को पूरा किया गया है.
हालाँकि वाजपेयी इस सवाल का कोई जवाब नहीं दे सके कि हर साल एक करोड़ नए रोज़गार मुहैया कराने का वादा कहाँ तक पूरा हुआ है. इस सवाल के जवाब में वाजपेयी ने कहा कि नए रोज़गार दिलाने के प्रयास जारी हैं इसलिए इस वादे को इस साल के साझा कार्यक्रम में भी दोहराया गया है. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का यह साझा कार्यक्रम जारी करने के समय संयोजक जॉर्ज फ़र्नांजीस, वित्त मंत्री जसवंत सिंह, अकाली नेता प्रकाश सिंह बादल, तृणामू काँग्रेस की नेता ममता बनर्जी, भाजपा नेता प्रमोद महाजन, सुषमा स्वराज वग़ैरा भी मौजूद थे. देखा जाए तो भारतीय जनता पार्टी के दृष्टि पत्र का इस साझा कार्यक्रम पर ख़ासा असर नज़र आता है. आर्थिक विषयों, राम मंदिर और अल्पसंख्यक जैसे मुद्दों पर एनडीए के एजेंडे में भाजपा के एजेंडे की बातें दोहराई गई हैं. विदेशी का भूत विदेशी मूल के लोगों को विभिन्न संवैधानिक पदों से क़ानूनी तौर पर दूर रखने की भाजपा की माँग भी एनडीए के साझा कार्यक्रम में नज़र आई. "भारत का शासन भारतीयों के द्वारा ही" शीर्षक के नीचे लिखा है कि "भारतीय राज्य व्यवस्था के सभी महत्वपूर्ण पदों के लिए केवल भारतीय मूल के भारतीय नागरिकों को ही योग्य बनाए जाने वाला एक क़ानून बनाया जाएगा. |
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