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सोनिया फिर आईं भाजपा के निशाने पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चुनाव के दिन नज़दीक़ आने के साथ ही विभिन्न मुद्दे अपना रंग दिखा रहे हैं और इसमें कांग्रेस नेता सोनिया गाँधी का विदेशी मूल का मुद्दा कहीं न कहीं से घूम-फिरकर केंद्र में आ ही जाता है. अब बयानबाज़ी की ज़िम्मा दोनों प्रमुख पार्टियों के नेताओं ने सँभाल लिया है और बाक़ी पार्टियाँ फ़िलहाल टिकट बाँटने से लेकर दूसरे मसलों में व्यस्त-सी दिख रही हैं. भारतीय जनता पार्टी ने लगभग स्पष्ट शब्दों में मान लिया कि विदेशी मूल का मुद्दा उसके लिए सिद्धांत रूप में तो मुद्दा है ही. मूल का मसला भाजपा ने कहा कि सोनिया गाँधी के विदेशी मूल का मसला पार्टी के लिए एक सिद्धांत का मसला है और वह उसे नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती.
पार्टी प्रवक्ता मुख़्तार अब्बास नक़वी ने कहा कि कांग्रेस ने सांप्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता जैसे मसलों का वोट की मशीन के रूप में इस्तेमाल किया है और अब इस नाम पर विकास को लेकर देश में भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश हो रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी मुद्दे के बिना हवा में ही बयानबाज़ी कर रही है. पार्टी ने साझी विरासत ट्रस्ट की ओर से टेलीविज़न चैनलों पर दिखाए जा रहे कुछ विज्ञापनों पर आपत्ति व्यक्त की और इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताया. नक़वी ने बताया कि इस बारे में चुनाव आयोग से शिकायत भी की गई है. नक़वी ने कहा कि इनमें से एक विज्ञापन में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को 'अंग्रेजों का मुखबिर' बताया गया है जो कि सरासर दुर्भावनापूर्ण है. पार्टी ने इस तरह के विज्ञापनों पर तुरंत रोक की माँग की है. नहीं दिया बयान कांग्रेस नेता अर्जुन सिंह ने एक बयान जारी करके कहा कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी उनके बयान को बेवजह तूल दे रही है.
उन्होंने एक बयान जारी करके कहा है कि समाजवादी पार्टी कांग्रेस के साथ समझौता नहीं करने के लिए उनके जिस बयान को आधार बना रही है वैसा कोई बयान तो उन्होंने दिया ही नहीं. इस बयान में कहा गया है कि उन्होंने कभी भी उत्तर प्रदेश की सपा सरकार से समर्थन वापसी की धमकी नहीं दी थी. वैसे कांग्रेस ने पिछले दिनों उत्तर प्रदेश सरकार से समर्थन वापसी की दबे-छिपे शब्दों में धमकी दी थी मगर अब उसके सुर कुछ नरम से दिख रहे हैं. राजनीतिक गलियारों में चर्चा गर्म है कि कांग्रेस अब चुनाव पूर्व समझौता नहीं हो पाने पर चुनाव के बाद समझौते की उम्मीद लगाए बैठी है इसलिए वह शायद फ़िलहाल समर्थन वापसी का फ़ैसला टाल दे. साथ ही, कांग्रेस ने साझा विरासत ट्रस्ट की ओर से दिखाए जा रहे विज्ञापनों से ख़ुद को किनारे करते हुए कहा है कि उसका इन विज्ञापनों से कुछ भी लेना देना नहीं है. |
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