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लाहौर में बारातियों जैसा स्वागत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
शाम ढल जाने के बाद लाहौर पहुँचकर यह सोचने की ज़रूरत नहीं पड़ी कि मैच शुरू होने तक आख़िर क्या करें. हवाई अड्डे से शहर पहुँचते ही देखा कि भारत से आए क्रिकेट प्रेमियों की भीड़ लिबर्टी बाज़ार से लेकर अनारकली बाज़ार तक फैली हुई है. लिबर्टी बाज़ार में जमकर ख़रीदारी हो रही है और अनारकली बाज़ार में खाने-पीने की तैयारी. पाकिस्तान और भारत के झंडे एक दूसरे के साथ इस तरह सिल दिए गए हैं मानो दो दोस्त हाथ में हाथ डाले चले जा रहे हों. झंडे और बैनर भारतवासियों के स्वागत में शब्दों के फूल बरसा रहे हैं. अनारकली बाज़ार के कोने में क्लैरिनेट थामे मस्ती में झूमते हुए एक लाहौरी जो गाना बजा रहा था वो शायद पूरे शहर की दिल की बात कह रहा था--बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है... भूख मुझे भी लगी थी और खाने की खुशबू से बढ़ती जा रही थी, मुझे लगा कि शाकाहारी खाना ढूँढने में तकलीफ़ होगी लेकिन दुकानदार ने कहा, "आइए जनाब, आपके लिए ही बनाई है मकई की रोटी और सरसों का साग." अभी खाना शुरू ही किया था कि बिना माँगे वेटर बगल की दुकान से लस्सी का बड़ा गिलास लिए चला आया और बोला, "साहब, मलाई वाली है, बिना बर्फ़ की." पूरा शहर, बचपन में गाँवों में जाने वाली बारात की याद ताज़ा कर गया. ऐसा लगा कि बारातियों के स्वागत में टूट पड़ा है लाहौर शहर. क्रिकेट के टेस्ट मैचों में कौन जीतेगा, कौन हारेगा, इसकी फ़िक्र कौन करे, यहाँ तो दिलों को जोड़ने वालों का मेला है, अपनों को गले लगाने की होड़ है. ऐसी गर्मजोशी है, दोस्ती में चमकती आँखों की ऐसी अनकही दास्तानें हैं जिन्हें सुनने-सुनाने वाले हर गली, हर मोड़ पर इंतज़ार करते मिल जाते हैं. |
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