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मंगलवार, 23 मार्च, 2004 को 20:15 GMT तक के समाचार
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टीवी विज्ञापन पर विवाद

भाजपा के नेता प्रमोद महाजन और वैंकया नायडू
भाजपा ने विज्ञापन को सही ठहराया है
राजनीतिक तापमान बढ़ने के साथ ही विवादों का बढ़ना भी स्वाभाविक है और इसी कड़ी में ताज़ा मामला है समाचार चैनलों पर आ रहे विज्ञापनों का.

राजनीतिक अर्थ वाले ये विज्ञापन प्रत्यक्ष रूप से तो किसी राजनीतिक दल की ओर से नहीं हैं मगर इनके संदेश बिल्कुल ही साफ़ हैं.

'आज तक' और 'ज़ी न्यूज़' जैसे चैनलों पर सोमवार रात से शुरू हुए एक विज्ञापन के बाद इस पूरे विवाद ने तूल पकड़ा.

विज्ञापन 'कामाक्षी ट्रस्ट' नाम की किसी संस्था की ओर से दिखाया जा रहा है जिसमें 'कर चले हम फ़िदा जानो तन...' गाने का इस्तेमाल किया गया है.

साथ ही 'विदेशियों भारत छोड़ो' जैसे नारे भी उस विज्ञापन में दिखाए जा रहे हैं. विज्ञापन में दिखाया गया है कि किस तरह स्वतंत्रता सेनानियों ने देश से विदेशी शासन को हटाने के लिए संघर्ष किया.

विज्ञापन का कहना है कि अब किसी 'विदेशी' के हाथ में सत्ता नहीं दी जा सकती है.

अब भले ही विज्ञापन में किसी का नाम प्रत्यक्ष रूप से नहीं लिया गया हो मगर संदेश बिल्कुल स्पष्ट है. ये बात कांग्रेस पार्टी को अखरनी थी और वही हुआ.

कांग्रेस की आपत्ति

संवाददाता सम्मेलन में पार्टी प्रवक्ता कपिल सिब्बल ने इस विज्ञापन पर कड़ी आपत्ति उठाई.

कपिल सिब्बल
कांग्रेस प्रवक्ता का कहना है कि सोनिया गाँधी पर निजी हमला हो रहा है

उधर जब भारतीय जनता पार्टी के संवाददाता सम्मेलन में ये मसला उठा तो पार्टी महासचिव प्रमोद महाजन ने कहा कि समाचार चैनलों पर पहले से ही एक विज्ञापन दिखाया जा रहा है जिसमें एक वृद्ध व्यक्ति यूनिट ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया के मसले पर सरकार पर उंगली उठा रहा है. इसलिए ये विज्ञापन भी जायज़ है.

मगर कांग्रेस का कहना है कि इस विज्ञापन में आलोचना का स्तर 'घटिया' है और यूटीआई मसले वाला विज्ञापन तो सरकार की आलोचना करता है जो लोकतंत्र में ठीक भी है.

सिब्बल का कहना है कि कांग्रेस पार्टी की आलोचना करने वाला विज्ञापन दिखाया जाए तो उसमें कोई परेशानी नहीं है मगर ये विज्ञापन व्यक्ति विशेष को निशाना बनाकर दिखाया जा रहा है.

कांग्रेस ने मामला चुनाव आयोग के पास ले जाने का फ़ैसला किया है.

यूटीआई का मसला उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा विज्ञापन भी एक ऐसे ही ट्रस्ट 'साझी विरासत ट्रस्ट' की ओर से दिखाया जा रहा है.

अब ऐसे में दोनों ही दलों का आरोप-प्रत्यारोप बढ़ता जा रहा है और चैनलों पर दबाव बढ़ रहा है कि वे भी किसी तरह की आचार संहिता का पालन करें.

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