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भारत-पाकिस्तान बातचीत की मेज पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और पाकिस्तान अपनी कटुता ख़त्म करने की कोशिश के तहत क़रीब तीन साल बाद एक बार फिर बातचीत की मेज़ पर बैठे हैं. इसमें बातचीत आगे जारी रखने के एजेंडे पर विचार किया जाना है. लगभग तीन साल के बाद दोनों देशों के बीच अधिकारी स्तर की बातचीत सोमवार को इस्लामाबाद में शुरू हुई. इस साल जनवरी में इस्लामाबाद में हुए सार्क सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने संबंध सुधारने के लिए बातचीत की पेशकश की थी. तीन साल पहले जुलाई 2001 में आगरा वार्ता की नाकामी के बाद से यह प्रक्रिया ठप्प पड़ी थी. उसके बाद दिसंबर 2001 को भारतीय संसद पर हुए एक चरमपंथी हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बहुत बढ़ गया था और युद्ध की नौबत तक नज़र आने लगी थी.
सोमवार की बातचीत को दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने रचनात्मक और दोस्ताना माहौल में हुई बातचीत बताया है. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मसूद ख़ान ने कहा कि दोनों देशों को यह अहसास हो गया है कि लड़ाई कोई रास्ता नहीं हो सकता. "हमें दोनो देशों के बीच मतभेदों के शांतिपूर्ण हल के लिए रास्ते निकालने पर ध्यान देना होगा." दूसरी तरफ़ भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने दिल्ली में कहा कि अधिकारी फिलहाल आगे की बातचीत का दायरा और कार्यक्रम तय करेंगे. "इस दिशा में दोनों तरफ़ से कुछ प्रस्ताव रख गए हैं." नवतेज सरना ने दिल्ली में एक पत्रकार सम्मेलन में यह भी बताया कि भारत सरकार ने पाकिस्तान के आठ नागरिकों को रिहा करने का फ़ैसला किया है. इन पाकिस्तानी नागरिकों को सीमा पार करके भारतीय क्षेत्र में दाख़िल होने के आरोप मे बंदी बनाया गया था. |
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