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मानवीय व्यवहार के निर्देश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने सुरक्षा अधिकारियों से कहा है कि वे यह सुनिश्चित करें कि कश्मीर में कार्रवाई के दौरान मानवाधिकारों का उल्लंघन न हो. उन्होंने दिल्ली में शनिवार को शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों की बैठक में कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की. उन्होंने इस बैठक में अर्धसैनिक बलों और कश्मीर के अधिकारियों से कहा है कि वे ध्यान रखें कि अलगाववादियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के दौरान आम नागरिकों को कोई नुक़सान न हो और मानवाधिकारों का उल्लंघन न हो. गृहमंत्री आडवाणी को यह बैठक पिछले हफ़्ते बांदीपोरा ज़िले में पाँच आम नागरिकों की मौत के बाद बुलानी पड़ी है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि सुरक्षा बल इन लोगों को ज़बरदस्ती उठाकर ले गए थे और चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के दौरान उनका उपयोग सुरक्षा कवच की तरह किया था. हालांकि सुरक्षा बल इन आरोपों का खंडन करते हैं और कह रहे हैं कि इन नागरिकों की मौत चरमपंथियों की गोलियों से हुई. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि नागरिकों की मौत के बाद केंद्र से बातचीत में लगी हुर्रियत की ओर से सरकार पर दबाव बढ़ गया था कि यदि इस तरह की कार्रवाई नहीं रोकी गई तो उनके लिए सरकार से बात कर पाना संभव नहीं होगा. उल्लेखनीय है कि ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ़्रेस ने केंद्र सरकार से कश्मीर समस्या हल करने के लिए केंद्र सरकार से बात करना स्वीकार किया है और गत 22 जनवरी को पहले दौर की बातचीत हो भी चुकी है. समाचार एजेंसियों के अनुसार लालकृष्ण आडवाणी ने अधिकारियों से कहा है कि वे इस बात का ध्यान रखें कि नागरिकों से बात करते हुए सुरक्षाकर्मी नरमी बरतें और उनसे मानवीय व्यवहार करें. समाचार एजेंसी रॉयटर का कहना है कि इस बैठक में कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था का नए सिरे से जायज़ा लिया गया. एजेंसी के अनुसार इस बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि ठंड ख़त्म होने के बाद बर्फ़ पिघलेगी और तब चरमपंथियों के हमले बढ़ सकते हैं. |
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