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सोमवार, 26 जनवरी, 2004 को 10:32 GMT तक के समाचार
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मुशर्रफ़ को कश्मीर के हल की उम्मीद
प्रधानमंत्री वाजपेयी और राष्ट्रपति मुशर्रफ़
प्रधानमंत्री वाजपेयी और राष्ट्रपति मुशर्रफ़ सार्क सम्मेलन के दौरान मिले थे

पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा है कि यदि भारत और पाकिस्तान दोनों लचीलापन दिखाएँ तो कश्मीर समस्या का हल निकल सकता है.

भारत और पाकिस्तान दोनों ही कश्मीर पर दावा करते हैं और इसे लेकर दोनों देशों के बीच पिछले पाँच दशकों से विवाद चला आ रहा है.

जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ का कहना है कि बीच का कोई रास्ता निकाला जा सकता है जो तीनों पक्षों को मंज़ूर हो.

इसी महीने की शुरुआत में भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर सहित सभी मसले पर बातचीत की सहमति हुई है.

बीबीसी वर्ल्ड के एशिया टुडे कार्यक्रम में सोमवार को परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा, ''दोनों देशों को कहीं बीच में मिलना होगा.''

परवेज़ मुशर्रफ़ के चार सुझाव
हमें बातचीत शुरु करनी चाहिए.
हमें कश्मीर की वास्तविकता को स्वीकार करना चाहिए.
जो कुछ भी भारत, पाकिस्तान और कश्मीर को मंज़ूर नहीं है उसे हटा दें.
जो भी समाधान सभी को मंज़ूर हो उसे स्वीकार कर लिया जाए

उन्होंने कहा, ''मैं समस्या के हल के लिए चार क़दम सुझाता रहा हूँ. एक तो हमें बातचीत शुरु करना चाहिए. दूसरे हमें कश्मीर की वास्तविकता को स्वीकार करना चाहिए. तीसरा जो कुछ भी भारत, पाकिस्तान और कश्मीर को मंज़ूर नहीं है उसे हटा दें और चौथा यह कि जो भी समाधान सभी को मंज़ूर हो उसे स्वीकार कर लिया जाए. ''

लेकिन उन्होंने कहा कि मौजूदा नियंत्रण रेखा को अंतरराष्ट्रीय सीमा में बदलने का प्रस्ताव पाकिस्तान को मंज़ूर नहीं है.

उन्होंने कहा, ''इस नियंत्रण रेखा को लेकर हम युद्द करते रहे हैं और कोई विवाद कभी हल नहीं बन सकता.''

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कहा कि दोनों देशों में वातावरण समस्या का हल निकालने के अनुकूल है.

उनका कहना था, '' ज़्यादातर लोग (भारत के) शांति चाहते हैं और सारी समस्याओं के हल भी.''

इंकार

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने इस्लामिक चरमपंथियों से भारत प्रशासित कश्मीर में कभी संघर्ष करने को नहीं कहा.

उन्होंने कहा, ''वे हमारे नियंत्रण में कभी नहीं थे.''

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने इस बात से इंकार किया कि उन पर हुए हमलों के पीछे कश्मीरी चरमपंथी हो सकते हैं.

परमाणु सूचनाएँ दूसरे देशों को दिए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हो सकता है कि कुछ व्यक्तियों ने व्यक्तिगत स्वार्थवश परमाणु सूचनाएँ दूसरे देशों को दी हों लेकिन इसकी जानकारी सरकार को नहीं थी.

उन्होंने कहा कि हो सकता है कि पैसों के लिए उन्होंने यह सब किया हो.

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