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समझौते का भारतीय कश्मीर में स्वागत
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद

भारत प्रशासित कश्मीर में अनेक नेताओं ने भारत और पाकिस्तान के बीच अगले महीने से होने वाली प्रस्तावित बातचीत के फ़ैसले का स्वागत किया है.

पृथकतावादी संगठन हुर्रियत कान्फ्रेंस ने भी दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू करने के फ़ैसला का स्वागत किया है लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि कश्मीरियों की इच्छाओं का कोई ज़िक्र नहीं किया गया है.

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने मंगलवार को इस्लामाबाद में ऐलान किया कि दोनों देश आपसी बातचीत फ़रवरी से फिर से शुरू करने पर सहमत हो गए हैं.

उससे पहले भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और परवेज़ मुशर्रफ़ के बीच सोमवार को मुलाक़ात हुई थी जिसके बाद किसी संयुक्त बयान की उम्मीद की जा रही थी.

परवेज़ मुशर्रफ़ ने इस समझौते को ऐतिहासिक क़रार दिया है.

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने कहा, "यह एक ऐतिहासिक फ़ैसला है. दोनों देशों ने आगे की ओर क़दम बढ़ाया है."

उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया में समय तो लगेगा लेकिन ये बहुत अच्छी बात है कि दोनों देशों ने अच्छी पहल की है.

 यह एक ऐतिहासिक फ़ैसला है. दोनों देशों ने आगे की ओर क़दम बढ़ाया है

मुफ़्ती मोहम्मद सईद

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच शांति स्थापना के लिए दबाव दरअसल इन देशों की जनता ने बनाया है.

"दोनों देशों के आम आदमी को शांति पसंद है न कि युद्द."

मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने आशा जताई कि पाकिस्तान का यह वादा काफ़ी सकारात्मक है कि वो पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में आतंकवाद को फलने-फूलने नहीं देगा.

उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों की सीमा पर आतंकवाद की घटनाएं काफ़ी कम हो सकती हैं.

हुर्रियत

अलगाववादी संगठन सर्वदलीय हुर्रियत कान्फ्रेंस के अध्यक्ष सय्यद अली शाह गिलानी ने भी दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत के फ़ैसले का स्वागत किया है.

दोनों देशों के संयुक्त बयान में कश्मीर के आम लोगों के बारे में कोई ज़िक्र नहीं है, मैं इससे बहुत नाख़ुश हूँ.

गिलानी

लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी कहा है, "दोनों देशों के संयुक्त बयान में कश्मीर के आम लोगों के बारे में कोई ज़िक्र नहीं है, मैं इससे बहुत नाख़ुश हूँ."

दूसरी तरफ़ हुर्रियत कान्फ्रेंस के अंसारी धड़े के प्रवक्ता अब्दुल ग़नी बट्ट का कहना था, "कश्मीर पर बातचीत का मतलब है - कश्मीर के लोगों के बारे में बातचीत, न कि उस क्षेत्र की."

आपसी मतभेदों के बावजूद हुर्रियत कॉंफ्रेंस के दोनों धड़ों ने कहा है कि कश्मीर में जो सशस्त्र अभियान चल रहा है वो 'आतंकवाद' नहीं बल्कि 'आज़ादी की लड़ाई' है.

लेकिन साथ ही अब्दुल ग़नी बट्ट का कहना है कि इसमें कोई हर्ज नहीं कि कश्मीर में शांति क़ायम हो.

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