कराची में 'पाँच लाख' हेरोइन के नशेड़ी

इमेज स्रोत, BBC World Service
संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि पाकिस्तान में लगभग पांच लाख लोग हेरोइन के नशे के आदी हो चुके हैं. इनमें से ज्यादातर लोग कराची में रहते हैं जो देश का सबसे बड़ा शहर है.
नशे का शिकार बन चुके इन लोगों की लत छुड़ाना आसान नहीं है. इन लोगों को कमरों में बंद कर दिया जाता है ताकि वे नशा न कर सकें.
कराची स्थित ज़ैनाब बाज़ार की सड़क एक ऐसी ही जगह है जहां नशा और नशा करने वालों की कहानियां नंगी आंखों से देखी और पढ़ी जा सकती हैं.
किसी का नाम हुसैन है, किसी का यूसुफ और किसी का सिकंदर, पर कहानी सबकी एक जैसी है.
'मां हूं ना'
कराची स्थित ईदी फॉउंडेशन नशे की राह पर चल पड़े ऐसे युवकों को दोबारा सही रास्ते पर लाने के लिए काम कर रहा है.
सिंकदर को यहां भर्ती कराया गया है. उनकी मां कहती हैं, ''मैंने अपने बच्चे को कभी अपने से दूर नहीं किया लेकिन अब उसकी भलाई के लिए उसे यहां भेजा ताकि वो नशा करना छोड़ दे. मैं उसे देख-देखकर तंग आ गई थी.''
वे कहती हैं, ''कई बार मन किया कि उसे घर से निकाल दूं, रिश्तेदारों को बुलाकर उसकी पिटाई करवाऊं, लेकिन मां हूं न, इसलिए ये भी नहीं कर सकती थी. मैं उसे घर से नहीं निकाल सकती हूं. मां हूं ना.''
इलाज का भरोसा
अपने बच्चों की नशे की लत छुड़ाने के लिए परिवार के सदस्य ईदी फॉउंडेशन के लोगों को खुद फोन करके बुलाते हैं. लोगों को ईदी फॉउंडेशन पर बड़ा भरोसा है. पर यहां इलाज कैसे किया जाता है.
डॉक्टर अयाज मेमम बताते हैं, ''हम इन लोगों का लक्षणों के मुताबिक उपचार करते हैं जिसे कोल्ड-टर्की कहते हैं. जैसे सिर में दर्द है तो सिरदर्द की दवा दे दी. इलाज के उन्नत तरीकों के लिए हमारे पास कुशल कर्मचारी नहीं हैं न उन्हें भर्ती करने के लिए जरूरी संसाधन ही हमारे पास हैं.''
उन्होंने बताया कि ईदी फॉउंडेशन के छह अलग-अलग केंद्रों में इस वक्त लगभग 4500 हजार मरीज भर्ती हैं.
यहां आकर कितने लोगों की नशे की लत छूट जाती है, ये पूछने पर डॉक्टर अयाज मेमम कहते हैं, ''इस बारे में हमारे पास कोई आंकड़ें नहीं हैं लेकिन जिन्हें यहां भर्ती कराया जाता है और उन्हें हम जो दवा देते हैं, जब वो उस दवा को लेना छोड़ देते हैं तो उनके पुनर्वास के अवसर बढ़ जाते हैं.''
'नशा छोड़ा जा सकता है'
ईदी फॉउंडेशन में कुछ दिन बिताने वाले सिकंदर से जब उनका अनुभव पूछा गया तो उन्होंने बताया, ''नशा छोड़ना मुश्किल तो लगा लेकिन मुझे लगता है कि 10-15 दिन में नशा छोड़ा जा सकता है. मुझे नहीं लगा कि मैं चुस्त-दुरुस्त नहीं हूं.''
सवाल उठता है कि कराची में इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग्स आखिर आते कहां से हैं. नशा करने वाले ही बताते हैं कि अफगानिस्तान की अफीम, कराची बंदरगाह के रास्ते दुनियाभर में जाती है.
यही वजह है कि यहां हेरोइन बड़ी आसानी से मिल जाती है और कई बार तो इसकी कीमत दो वक्त की रोटी से भी सस्ती होती है.












