पाकिस्तान में बाढ़ की स्थिति बदतर

पाकिस्तान में बाढ़ आए तीन हफ़्ते हो गए और स्थिति बद से बदतर होती जा रही है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युसूफ़ रज़ा गिलानी कह चुके हैं कि बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या दो करोड़ तक पहुँच चुकी है.
ऐसी ख़बरें मिली हैं कि नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है और हज़ारों लोगों को सर छुपाने के लिए जगह की तलाश है.
पाकिस्तान के मुख्य मौसम विज्ञानी ने चेतावनी दी है कि सिंधु नदी का जलस्तर इस सप्ताह के अंत तक अपने चरम पर होगा.
बाढ़ से फसलों को भारी नुक़सान पहुँचा है और बाढ़ के कारण लोग अलग थलग पड़ गए हैं और उन्हें केवल विमानों से सहायता पहुँचाया जाना संभव है.
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि क़रीब आठ लाख बाढ़ पीड़ित ऐसे हैं जिन तक सिर्फ़ वायुमार्ग से ही पहुँचा जा सकता है.
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के उपमहासचिव जॉन होम्स ने कहा, " इस अभूतपूर्व बाढ़ की वजह से संसाधनों की अभूतपूर्व चुनौती पेश आ रही है और इससे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को असाधारण प्रयास करने होंगे."
हालांकि सिंध के एक वरिष्ठ मंत्री का कहना था कि बाढ़ सहायता का काम युद्धस्तर पर चल रहा है.
इससे पहले प्रधानमंत्री युसूफ़ रज़ा गिलानी ने चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा था कि अब बाढ़ पीड़ितों के बीच महामारी का ख़तरा मंडरा रहा है.
फसलें तबाह
दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन के प्रमुख डेनिएल डॉनाति ने कहा है कि बाढ़ से फसलें पूरी तरह तबाह हो गईं हैं
यूरोपीय संघ की एक वरिष्ठ अधिकारी क्रिस्टीलिना जॉर्जिवा का कहना है कि यदि अगले मौसम में बुआई नहीं हुई तो पाकिस्तान को खाद्य संकट का सामना करना पड़ सकता है.
इधर संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि पाकिस्तान में बाढ़ सहायता के लिए उसने 30 करोड़ डॉलर इकट्ठा किए हैं और ये धनराशि संयुक्त राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र खाद्य कार्यक्रम में इस्तेमाल की जाएगी.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ये राशि अक्तूबर तक आपात सहायता के काम में खर्च की जाएगी.
लेकिन पाकिस्तान सरकार का कहना है कि बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण के काम में लाखों डॉलर की ज़रूरत पड़ेगी. इसके लिए पाकिस्तान सरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से बातचीत कर रही है.
सदी की सबसे भीषण बाढ़ से पाकिस्तान का पाँचवाँ हिस्सा पानी में डूबा हुआ है और इसकी वजह से 12 लाख से ज़्यादा मकान नष्ट हो गए हैं.
लाखों हेक्टेयर की फसल नष्ट हो गई है और लाखों लोगों को घर-बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा है.













