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मंगलवार, 10 फ़रवरी, 2009 को 13:16 GMT तक के समाचार
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'ईरान अमरीका से बातचीत के लिए तैयार'
महमूद अहमदीनेजाद
ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने कहा है कि वे अमरीका के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, अगर वह बातचीत 'परस्पर सम्मान' पर आधारित हो.

ईरान में इस्लामी क्रांति की 30वीं वर्षगाँठ के मौक़े पर राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने कहा कि वे अमरीका के रवैए में बदलाव का स्वागत करेंगे बशर्ते की वह बदलाव 'बुनियादी' हो.

उन्होंने कहा, "ईरान बातचीत के लिए तैयार है अगर वह बातचीत उचित वातावरण में हो."

ईरान में 1979 में इस्लामी क्रांति के बाद विद्रोहियों ने तेहरान में अमरीकी दूतावास पर 444 दिनों के लिए कब्ज़ा कर लिया था जिसके बाद अमरीका ने ईरान से कूटनीतिक रिश्ते तोड़ लिए थे.

 नए अमरीकी प्रशासन ने बातचीत के ज़रिए बदलाव लाने की बात कही है, हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि बदलाव वास्तविक होना चाहिए न कि रणनीतिक, ईरान की जनता किसी भी वास्तविक बदलाव का स्वागत करेगी, ईरान के लोग परस्पर सम्मान और बराबरी के माहौल में बातचीत के लिए तैयार हैं
महमूद अहमदीनेजाद

तेहरान में हज़ारों लोगों की रैली को संबोधित करते हुए ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, "नए अमरीकी प्रशासन ने बातचीत के ज़रिए बदलाव लाने की बात कही है, हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि बदलाव वास्तविक होना चाहिए न कि रणनीतिक, ईरान की जनता किसी भी वास्तविक बदलाव का स्वागत करेगी, ईरान के लोग परस्पर सम्मान और बराबरी के माहौल में बातचीत के लिए तैयार हैं."

अहमदीनेजाद का बयान ऐसे समय आया है जबकि बराक ओबामा प्रशासन ने "ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत की संभावनाओं" पर विचार करने की बात कही है.

हाल के वर्षों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों और ख़ास तौर पर अमरीका से उसके रिश्ते बिगड़े हैं, पश्चिमी देशों को शक है कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है जबकि ईरान का कहना है कि उसका कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है.

ओबामा का बयान

अमरीका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा, "मुझे लगता है कि परस्पर सम्मान और प्रगति की संभावना है, अब यह ईरान को चाहिए कि वह सकारात्मक संकेत दे कि वह अपने रवैए में बदलाव के लिए तैयार है."

इससे पहले तक पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने ईरान को उत्तर कोरिया और इराक़ के साथ 'दुष्टता की धुरी' क़रार दिया था.

तेहरान से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अहमदीनेजाद के ताज़ा बयान से उनकी मंशा स्पष्ट नहीं है कि वे सचमुच बातचीत चाहते हैं या सिर्फ़ बयानबाज़ी कर रहे हैं.

इससे पहले जनवरी में अहमदीनेजाद ने कहा था कि अमरीका को अपनी ग़लतियों के लिए माफ़ी माँगनी चाहिए तभी बातचीत के लिए माहौल बन सकता है, लेकिन इस बार उन्होंने ये बात नहीं कही है.

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