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उत्तर कोरिया ने दक्षिण से समझौता तोड़ा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया पर शत्रुतापूर्ण व्यवहार का आरोप लगाते हुए उसके साथ अपने सारे सैन्य और राजनीतिक समझौते तोड़ने की घोषणा की है. दोनों देशों के रिश्तों पर नज़र रखने वाली उत्तर कोरिया की समिति ने कहा है कि दक्षिण कोरिया ने रिश्तों को 'युद्ध की कगार' पर ला खड़ा किया है. दक्षिण कोरिया ने इस घोषणा पर अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए बातचीत की पेशकश की है. दोनों देशों की नौसेनाएँ 2002 और 1999 में ख़ूनी संघर्ष हो चुका है. जिस समझौते को तोड़ने की घोषणा की है उसमें 'येलो-सी' के समुद्री तट के इलाक़े में संघर्ष विराम शामिल है. 'गुंजाइश नहीं' दोनों कोरिया के शांतिपूर्ण एकीकरण के लिए गठित समिति ने कहा है, "उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच सैन्य और राजनीतिक संघर्ष रोकने के लिए जो सहमति बनी थी उसे ख़त्म किया जाता है." समिति ने कहा है, "अब स्थिति जहाँ पहुँच गई है वहाँ न रिश्तों में सुधार की गुंजाइश है और न उसे पटरी पर लौटाने की संभावना है." उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली म्यंग-बाक के प्रशासन के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी तेज़ कर दी है. ली म्यंग-बाक ने उत्तर कोरिया से कहा था कि अगर वह (उत्तर कोरिया) अपना परमाणु कार्यक्रम नहीं रोकता है तो उसे मिलने वाली सहायता रोक दी जाएगी. इस हफ़्ते की शुरुआत में उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया में एकीकरण के मामलों के नए मंत्री की नियुक्ति पर आपत्ति की थी. उसका कहना था कि ह्यून इक-ताएक की नियुक्ति अपने आपमें इस बात का संकेत है कि दक्षिण कोरिया दोनों देशों के बीच तनाव को बढ़ाना चाहता है. बीबीसी के संवाददाता जॉन सडवर्थ का कहना है कि कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि उत्तर कोरिया सरकार दक्षिण कोरिया के साथ तनाव को इसलिए भी बढ़ाना चाहती है ताकि वह अमरीका के नए प्रशासन के साथ ज़्यादा सौदेबाज़ी कर सके. |
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