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'पाक-अफ़ग़ान क्षेत्र जंग का केंद्रीय मोर्चा' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के नए राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अफ़ग़ानिस्तान में अल क़ायदा-तालेबान की समस्या और पाकिस्तान की स्थिति को सबसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय चुनौती बताया है. नए अमरीकी प्रशासन के दो अहम दूतों की नियुक्ति के समय राष्ट्रपति ओबामा ने ये विचार व्यक्त किए. नए दूतों में जॉर्ज मिचेल को मध्य-पूर्व के लिए और रिचर्ड हॉलब्रुक को अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान का कार्यभार सौंपा गया है. ऐसी ख़बरें हैं कि नई विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने इस घोषणा से पहले पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी से फ़ोन पर बातचीत की थी. 'जंग का केंद्रीय मोर्चा' विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि अफ़गानिस्तान की स्थिति को देखते हुए ये साफ़ है कि एक ऐसी साझा रणनीति की ज़रूरत है जो अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान दोनों ही पर लागू हो सके. अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान के दूत नियुक्त किए गए रिचर्ड हॉलब्रुक ने इससे पहले 1995 में हुए उस समझौते में अहम भूमिका निभाई थी जिसके बाद यूगोस्लाविया में युद्ध समाप्त हुआ था. ओबामा का कहना था, "अफ़ग़ानिस्तान में अल क़ायदा और तालेबान के ख़िलाफ़ संघर्ष के बिना समस्या का हल संभव नहीं है. तब तक स्थायी शांति कायम नहीं हो सकती जब तक अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के लोगों के लिए मौक़े बढ़ाए नहीं जाते. ये सच में सबसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय चुनौती है." उनका कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान के क्षेत्र में स्थिति ख़राब हो रही है. उनहोंने कहा, "उग्रवाद और आतंकवाद के ख़िलाफ़ जंग में ये हमारा केंद्रीय मोर्चा है. मध्य पूर्व की तरह हमें ये समझना होगा कि वहाँ भी हम समस्या का हल अलग-अलग नहीं निकाल सकते." उन्होंने कहा कि अल क़ायदा और तालेबान पाकिस्तान के कबायली इलाकों से बेरोकटोक हमला कर पा रहे हैं और ग्यारह सितंबर 2001 के बाद भले ही अमरीकी ज़मीन पर हमला नहीं हुआ हो लेकिन अल क़ायदा अभी खुला घूम रहा है और हमले की योजना बना रहा है. उनका कहना था कि उनकी टीम एक बार फिर से अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक नई नीति पर काम करेगी. राष्ट्रपति ओबामा का कहना था कि इस नीति के तहत उस इलाके की सरकारों के साथ साझेदारी मज़बूत की जाएगी, नैटो के साथ सहयोग बढ़ाया जाएगा, अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के लोगों के साथ रिश्तों को और गहरा किया जाएगा और आतंकवाद और चरमपंथ के ख़िलाफ़ सख़्त रणनीति अपनाई जाएगी. 'अलग देश, घटनाओं की वजह से जुड़े' अपने सख़्त अंदाज़ की वजह से 'बुलडोज़र' भी कहे जाने वाले रिचर्ड हॉलब्रुक को राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपनी पीढ़ी के सबसे काबिल कूटनीतिज्ञों में से एक बताया है. हॉलब्रुक ने कहा, "अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान दो बिल्कुल अलग देश हैं. उनके इतिहास अलग हैं लेकिन भौगोलिक रूप से, एक जैसी नस्ल के लोग होने की वजह से और वहां हो रही घटनाओं की वजह से दोनों जुड़े हुए हैं." उनका कहना था कि सामना एक 'ऐसे दुश्मन से है जो कुछ भी करने में नहीं झिझकता, जो लड़कियों के स्कूलों में पढ़ानेवाली महिलाओं का गला काट सकता है और जिसने दुनिया में कई कुकृत्य किए हैं.' उन्होंने इच्छा ज़ाहिर की है कि वो बहुत जल्द इलाके का दौरा करना चाहेंगे और फिर राष्ट्रपति और उनकी टीम को हालात से अवगत कराएँगे. |
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