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इंसान और मछली का शांतिपूर्ण सहअस्तित्व | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश अपने लंबे कार्यकाल में कई बातों के लिए याद रखे जाएँगे. चाहे वह सद्दाम का पतन हो या अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ में अमरीकी सेनाओं का प्रवेश. या फिर भारत-अमरीका परमाणु समझौता ही क्यों न हो. लेकिन एक बात और है जिसने उन्हें इतिहास में अमर कर दिया है और वह यह कि शायद ही अमरीका या किसी भी अन्य देश के राष्ट्राध्यक्ष की कई टिप्पणियाँ इतनी 'अबूझ' हों या चर्चा का विषय बनी हों. इन्हीं टिप्पणियों ने बुशिज़्म या बुशवाद जैसे प्रयोग को जन्म दिया. कुछ लोग तो यह भी मानते हैं कि ये बातें उनके सिर के ऊपर से निकल गईं. अब जैसे मिसाल के तौर पर उनका यह कहना कि 'इंसान और मछली शांतिपूर्ण सहअस्तित्व में रह सकते हैं'. या फिर यह कि 'युद्ध एक ख़तरनाक जगह है'. या फिर बुश का यह बयान कि 'मेरे कामकाज का एक सबसे मुश्किल पहलू है इराक़ को आतंक के ख़िलाफ़ युद्ध से जोड़ना'. लेकिन इनका असली आनंद तभी लिया जा सकता है जब यह टिप्पणियाँ उनकी अपनी ज़बान में पढ़ी या सुनी जाएँ. तो लीजिए पढ़िए भी और वीडियो भी देखिए |
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