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बुधवार, 24 सितंबर, 2008 को 04:06 GMT तक के समाचार
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संयुक्त राष्ट्र में बुश का अंतिम भाषण
जॉर्ज बुश
बुश ने आतंकवाद को अबतक की सबसे बड़ी चुनौती बताया
इन दिनों अमरीका के न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र की 63वीं वर्षगाँठ पर महाधिवेशन चल रहा है और राष्ट्रपति के रूप में जॉर्ज बुश ने इसे अंतिम बार संबोधित किया है.

अमरीकी राष्ट्रपति के संयुक्त राष्ट्र महाधिवेशन में अंतिम भाषण में आतंकवाद का ही मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा.

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सामने आतंकवाद से निपटना अबतक की सबसे बड़ी चुनौती है और इसपर प्रभावी ढंग से काम किया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के गठन से अबतक की सबसे बड़ी चुनौती के तौर पर आतंकवाद सामने आया है और साथ ही सदस्य देशों से अपील भी की कि इस चुनौती से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर सभी को साथ आना होगा.

अपने संबोधन में जहाँ जॉर्ज बुश ने सीरिया और ईरान को सीधा निशाना बनाते हुए कहा कि ये दोनों देश आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं वहीं जॉर्जिया पर हमलों के लिए रूस की भी आलोचना की.

अमरीकी राष्ट्रपति आर्थिक संकट के दौर पर चर्चा करने से नहीं चूके. उन्होंने इसपर भी चिंता व्यक्त की और कहा की अमरीका इससे निपटने के लिए ठोस क़दम उठा रहा है.

अमरीकी राष्ट्रपति के अलावा संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून भी आर्थिक संकट को लेकर चिंतित दिखे. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आर्थिक संकट का असर ग़रीबी से निपटने के प्रयासों पर भी पड़ेगा.

ज़रदारी से मुलाक़ात

न्यूयॉर्क में इस महाधिवेशन के साथ ही एक और अहम बैठक भी हुई. यह बैठक हुई अमरीका और पाकिस्तान के राष्ट्रपतियों के बीच.

ज़रदारी और बुश
आसिफ़ अली ज़रदारी की बतौर राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से यह पहली मुलाक़ात थी

पाकिस्तान का राष्ट्रपति बनने के बाद से आसिफ़ अली ज़रदारी से अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की यह पहली मुल़ाक़ात थी. बुश ने बातचीत के बाद कहा कि अमरीका पाकिस्तान की संप्रभुता का सम्मान करता है.

दरअसल, पिछले दिनों कई बार अमरीकी सेना के तालेबान लड़ाकों के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे अभियान में पाकिस्तान के आम नागरिक भी निशाना बने.

इसकी पाकिस्तान ने आलोचना करते हुए कहा था कि वो अपनी सीमा में किसी दूसरे देश की सेना को अभियान चलाने की अनुमति नहीं दे सकता क्योंकि यह पाकिस्तान की संप्रभुता का सवाल है.

पर मंगलवार की बैठक के बाद पाकिस्तान ने यह भी कहा कि उनके देश में लोकतंत्र की स्थापना में अमरीका का भी योगदान रहा है और इसके लिए पाकिस्तान ने अमरीकी राष्ट्रपति को धन्यवाद भी ज्ञापित किया.

अब न्यूयॉर्क में ही पाकिस्तान के राष्ट्रपति की मुलाक़ात भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से होने वाली है.

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