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जॉर्जिया संकट पर सुरक्षा परिषद की बैठक बेनतीजा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दक्षिण ओसेतिया में पैदा हुए ताज़ा संकट का समाधान खोजने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की दोबारा बैठक हुई पर कोई नतीजा नहीं निकाला जा सका है. शनिवार को हुई इस बैठक में कोई भी स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जा सका कि इस ताज़ा संकट से उबरने के लिए क्या किया जाना चाहिए. सुरक्षा परिषद इस मुद्दे पर दो अलग हिस्सों में विभाजित नज़र आ रहा है जिसमें एक ओर तो रूस है जो जॉर्जिया को ग़लत ठहरा रहा है और दूसरी ओर अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस हैं जो जॉर्जिया के अविभाज्य स्वरूप को बनाए रखने की पैरवी कर रहे हैं. उधर नए कूटनीतिक प्रयासों के तहत यूरोपीय संघ और अमरीका की ओर से एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल जॉर्जिया के लिए रवाना कर दिया गया है. यह प्रतिनिधिमंडल दोनों पक्षों के बीच संघर्षविराम घोषित कराने की पुरज़ोर कोशिश करेगा. ग़ौरतलब है कि रूस और जॉर्जिया के बीच जारी संघर्ष में अभी तक क़रीब 1500 लोगों की मौत हो चुकी है. इसमें आम नागरिक भी शामिल हैं. ताज़ा प्रयासों से पहले ही अमरीका के राष्ट्रपति की ओर से कहा जा चुका है कि रूस जॉर्जिया की संप्रभुता का सम्मान करे और बमबारी बंद करे. युद्ध जारी जानकारी के मुताबिक शनिवार को दूसरे दिन रूसी लड़ाकू विमानों ने जॉर्जिया के शहर गोरी में ज़ोरदार बमबारी की. रूसी विमानों ने सैनिक ठिकानों को हमले का निशाना बनाया लेकिन जॉर्जिया के अधिकारियों का कहना है कि इसमें बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे गए हैं. इससे पहले रूस ने घोषणा की थी कि उसने दक्षिणी ओसेतिया की राजधानी स्खिनवाली को 'मुक्त' करा दिया है जबकि जॉर्जिया का कहना है कि वहाँ अब भी उसका ही नियंत्रण है. रूसी थल सेना के कमांडर जनरल व्लादीमिर ब्लोडरेव ने कहा, "हमारे सैनिकों ने शहर को अपने कब्ज़े में ले लिया है, स्खिनवाली जॉर्जियाई सेना से पूरी तरह मुक्त हो गई है." रूस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने कहा है उनका देश जॉर्जिया को "शांति के रास्ते पर आने के लिए मजबूर कर रहा है." रूसी सेना के कमांडरों ने घोषणा की है कि वे और सैनिक दक्षिण ओसेतिया रवाना कर रहे हैं, रूसी सेना ने स्वीकार किया है कि उसके दो लड़ाकू विमान जॉर्जिया में मार गिराए गए हैं. आरोप-प्रत्यारोप कई दिनों से रूस समर्थित अलगाववादियों और जॉर्जिया की सेना के बीच लड़ाई चल रही थी, जब जॉर्जिया ने गुरूवार की रात को इस क्षेत्र पर कब्ज़ा करने के लिए तेज़ हमला किया तो रूस ने अपने टैंकों के साथ चढ़ाई कर दी.
1992 के बाद से ही यह दक्षिणी ओसेतिया जॉर्जिया के नियंत्रण से बाहर और काफ़ी हद तक स्वतंत्र ही रहा है. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लवारोव ने कहा है कि इस लड़ाई में अब तक डेढ़ हज़ार लोग मारे जा चुके हैं जिसमें 15 रूसी सैनिक भी हैं. जॉर्जिया के राष्ट्रपति मिखाइल साक्शविली का कहना है कि आम नागरिकों की मौत के बारे में रूसी अधिकारी 'झूठ' बोल रहे हैं, उनका कहना है कि मरने वालों की संख्या इससे बहुत ज्यादा है. जॉर्जिया का कहना है कि इसे सैनिक कार्रवाई नहीं कहना चाहिए, रूस ने जॉर्जिया पर सैनिक आक्रमण किया है और इसका जवाब देने के लिए जॉर्जिया ने विदेशी सैनिक सहायता की माँग की है, हालाँकि ऐसी कोई सहायता मिलने की कोई संभावना नहीं दिख रही है. बीबीसी के संवाददाता रिचर्ड गाल्पिन का कहना है कि गोरी शहर में ज़ोरदार धमाके सुने गए और चारों ओर से धुआँ उठता दिख रहा था, आम नागरिक और जॉर्जिया के सैनिक सड़कों पर जान बचाने के लिए भाग रहे थे. जॉर्जिया के विदेश मंत्री ने कहा है कि उसके पोटी बंदरगाह को भी रूसी लड़ाकू विमानों ने निशाना बनाया है, पोटी से जॉर्जिया बड़े पैमाने पर तेल का निर्यात करता है, विदेश मंत्री का कहना है कि पोटी बंदरगाह पूरी तरह तबाह हो गया है. रूस का दावा बीबीसी से एक बातचीत में रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि उनका देश जॉर्जिया से युद्ध नहीं चाहता लेकिन "दक्षिण ओसेतिया में स्थिरता लाना चाहता है और वहाँ के आम नागरिकों को जॉर्जिया के हमलों से सुरक्षित बनाना चाहता है."
दक्षिण ओसेतिया के अधिकतर लोगों को रूसी नागरिकता दी जा चुकी है. रूसी विदेश मंत्री लवारोव ने कहा कि "जॉर्जिया का यह आरोप ग़लत है कि वह उसके एक हिस्से को उससे अलग करना चाहता है, सच बात ये है कि जॉर्जिया ने शांति समझौते का उल्लंघन करके रूसी शांति सैनिकों पर हमला किया जिसके बाद हमें जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी. जॉर्जिया ने शांति समझौते को तोड़ा है और हम वहाँ यथास्थिति को वापस लौटाने के लिए कार्रवाई कर रहे हैं." शुक्रवार को हुई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में युद्धविराम की अपील जारी करने पर समझौता नहीं हो सका. सुरक्षा परिषद के अहम सदस्य ब्रिटेन, अमरीका और फ्रांस रूसी हमले को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं जबकि रूस का कहना है कि स्थिति जॉर्जिया की वजह से बिगड़ी. यही गतिरोध सुरक्षा परिषद की शनिवार को हुई बैठक में भी क़ायम रहा. अब जॉर्जिया इराक़ से अपने दो हज़ार सैनिकों को वापस बुला रहा है ताकि रूसी हमले का मुक़ाबला किया जा सके. यूरोपीय सुरक्षा और सहयोग एजेंसी ओएससीई ने चेतावनी दी है कि ओसेतिया की लड़ाई को अगर रोका नहीं गया तो वह बड़े युद्ध में बदल सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें बुश ने जॉर्जिया की क्रांति को सराहा 10 मई, 2005 | पहला पन्ना जॉर्जिया ने रूस पर गंभीर आरोप लगाए22 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना जॉर्जिया में ऊर्जा संकट गहराया27 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना पुतिन की जॉर्जिया पर तीखी प्रतिक्रिया 01 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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