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अमरीका ने समझौते पर प्रतिबद्धता जताई | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बुश प्रशासन ने कहा है कि भारत के साथ परमाणु समझौते की औपचारिकताएँ पूरी होते ही वह अमरीकी कॉंग्रेस से इसे मंज़ूरी दिलाने की कोशिश करेगा. अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय यानी व्हाइट हाउस के प्रवक्ता सीन मैक्कॉरमैक ने कहा कि अमरीका इस समझौते पर प्रतिबद्ध है. उनका कहना था, "अगर भारत सरकार कई मोर्चों पर चल रही बातचीत को पूरा कर लेता है तो अमरीका अपनी प्रतिबद्धता पूरी करने के लिए अपनी ओर से हर संभव कोशिश करेगा." प्रवक्ता ने कहा कि बुश प्रशासन इस मुद्दे पर डेमोक्रैटिक पार्टी के बहुमत वाली संसद के मुख्य सदस्यों को ताज़ा हालात से रू-ब-रू कराता रहा है. ओबामा की राय अमरीकी संसद में जाने से पहले भारत को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के निदेशक मंडल से निगरानी समझौते पर मंज़ूरी लेनी पड़ेगी. इसके बाद 45 सदस्यी परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों (एनएसजी) से बातचीत होगी. भारत परमाणु अप्रसार संधि में शामिल नहीं है, इसलिए एनसएसजी में विरोध के स्वर उठ सकते हैं. इस समझौते को अमरीकी और यूरोपीय परमाणु आपूर्तिकर्ता कंपनियों की लिहाज़ से अरबों डॉलर का माना जा रहा है. इस बीच अमरीका में राष्ट्रपति पद के डेमोक्रैट उम्मीदवार बराक ओबामा ने एक भारतीय पत्रिका को दिए इंटरव्यू में कहा है कि वो इस क़रार के समर्थन में हैं लेकिन इसमें और संशोधन करने का विरोध करते हैं. |
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