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भारत ने आईएईए को मसौदा सौंपा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी को परमाणु ठिकानों की निगरानी के मुद्दे से जुड़ा मसौदा सौंप दिया है. आईएईए की प्रवक्ता मेलिसा फ़्लेमिंग ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है, "भारत सरकार के अनुरोध पर आईएईए सचिवालय ने बुधवार को आईएईए बोर्ड ऑफ़ गवर्नर के सदस्यों को मसौदा दे दिया है." फ़्लेमिंग ने परमाणु क़रार के लिए भारत के इस क़मद को 'अहम पड़ाव' बताया. उन्होंने कहा कि आईएईए के चेयरमैन सदस्य देशों से बात करके मसौदे पर विचार के लिए तिथि तय करेंगे. वैसे माना जा रहा है कि यह बैठक 28 जुलाई को होगी. भारत की शर्त समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस का दावा है कि उसे भारत की ओर से भेजा गया मसौदा मिला है जो 23 पन्नों का है.
एपी के मुताबिक मसौदे में भारत ने आईएईए से अपने असैनिक परमाणु प्रतिष्ठानों की निगरानी के संबंध में शर्त रखी है. भारत ने कहा है कि वो विदेशों से ईंधन आपूर्ति बाधित होने पर अपने असैनिक परमाणु रिएक्टरों को निर्बाध तरीके से चलाने के लिए क़दम उठा सकता है. एपी के मुताबिक इसके ज़रिए भारत कुछ रिएक्टरों को निगरानी सूची से हटा सकता है और वहाँ परमाणु हथियार बनाने के लिए ज़रुरी सामग्री बनाई जा सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने मसौदे में वह हिस्सा खाली छोड़ दिया है जिसमें आईएईए कि निगरानी में रहने वाले रिएक्टरों का ज़िक्र होता है. रास्ता भारत और अमरीका ने 2006 में परमाणु समझौता हुआ था. वामदलों द्वारा औपचारिक रूप से समर्थन वापस लेने के बाद भारत सरकार ने ये मसौदा आईएईए को सौंपने में ज़रा भी देर नहीं की. ये माना जा रहा है कि आईएईए जुलाई माह के आख़िर तक इस मसौदे पर मुहर लगा देगा जिसके बाद परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों (एनएसजी) के साथ यूरेनियम आपूर्ति पर बात होगी. संभावना है अमरीका के सहयोग से एनएसजी में इस बात पर सहमति बन जाएगी. इसके बाद सितंबर में अमरीकी कॉंग्रेस से 123 समझौते को मंज़ूरी मिलने के बाद असैनिक परमाणु सहयोग समझौता अमल में आ सकता है. अड़चन अमरीका से परमाणु करार के मसले पर ही वामदलों ने कांग्रेस के नेतृ्त्व वाली यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया है. बुधवार को इन दलों ने समर्थन वापसी का पत्र राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को सौंपा.
ये पूरा घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब मनमोहन सिंह जापान में जी-8 सम्मेलन में हिस्सा ले रहे थे. उन्होंने वहाँ से बयान दिया था कि केंद्र सरकार जल्द ही परमाणु क़रार के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी आईएईए के पास जाएगी. इसी बयान के बाद वामदलों ने समर्थन वापस ले लिया. जुलाई-2005 में भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमरीकी राष्ट्रपित जार्ज डब्ल्यू बुश परमाणु करार पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हुए थे यह समझौता पिछले तीस सालों से भारत के साथ परमाणु समझैता न करने की नीति को उलटने वाला था. फिर मार्च-2006 में अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज बुश ने भारत की तीन दिनों की यात्रा की. इस दौरान भारत के रक्षा और नागरिक उपयोग के परमाणु रियेक्टरों को अलग- अलग करने की योजना पर दोनों देशों में सहमति बनी. लेकिन वामदलों का कहना था कि भारत सरकार आईएईए से बात न करे. लेकिन भारत को अंतिम रूप से परमाणु हस्तांतरण के लिए 45 सदस्यों वाले परमाणु सप्लाई ग्रुप और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की मज़ूरी ज़रूरी है. |
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